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उम्मीद

कभी तो उम्मीद जी उठेगी
कहीं तो मंज़र हसीं रहेगा
कोई तो ऐसा भी वक़्त होगा
कि जिसको हम पे यकीं रहेगा
कुछेक लम्हों की बात सुनकर
दुआ का दामन न छोड़ देना
किसी चुभन की कसक से चिढ़कर
हसीन गुंचे न तोड़ देना
सुबह के माथे का ये पसीना
सबा को छूकर महक उठेगा
किसी तबस्सुम की बाँह थामे
मलाल यकदम चहक उठेगा
नसीब बदलेगा गर्दिशों का
यहीं हज़ारों कँवल खिलेंगे
इन्हीं उदासी भरे दिनों से
कभी मुहब्बत के पल मिलेंगे
सवाल बदलेंगे ज़िन्दगी के
जवाब अपने यही रहेंगे
हम आज भी सौ टका खरे हैं
हम उस घड़ी भी सही रहेंगे
ज़ेहन में जो भी उठे तमन्ना
उसे कहीं दिल में डाल लेना
नसीब जिस दिन गले लगा ले
हरेक हसरत निकाल लेना

✍️ चिराग़ जैन

दीया आज़ादी का

दीपक जलते दीवाली के, दीपक जलते हैं यादों के
रौशनी बिखरती कातिक में, उत्सव मनते हैं भादो के
घर भर में ज्योति पसरती है, शादी-ब्याहों में टेलों में
जमकर आतिशबाज़ी होती, गर विजय मिली हो खेलों में
लेकिन हम मौन बिताते हैं, उत्सव अपनी आज़ादी का
आँगन में नहीं लगाते हैं इक दिव्य तिरंगा खादी का
दुनिया भर को मालूम चले मतलब अपनी आबादी का
हर आँगन में इस बार जले इक दीया अगर आज़ादी का

✍️ चिराग़ जैन

क्षमाभाव

झुकना, माफ़ी मांगना, कठिन बहुत है यार
लेकिन इसके बाद है, चैन-सुकून अपार

बढ़कर माफ़ी मांगिए, छोड़ गुमान गुरूर
हाँ, हल्का हो जाएगा, मन का बोझ हुज़ूर

कुपित हुए, कुढ़ते रहे, क्रोधी, मूढ़ अधीर
क्षमाभाव को धारकर, सहज रहे सो वीर

✍️ चिराग़ जैन

बंदिशें मुस्कान पर

लोग अब दौलत तिजोरी में कमाकर रख रहे हैं
और कुछ हैं जो बाज़ारों में धमाके रख रहे हैं
रख रही है जब सियासत बंदिशें मुस्कान पर
तब यहाँ कुछ लोग जीवन में ठहाके रख रहे हैं

✍️ चिराग़ जैन

उम्मीद के बिना

तुम हमेशा
मुझे दोषी ठहराती हो
कि मैं अपने रिश्तों में
उम्मीदें बहुत रखता हूँ

लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं
कि उम्मीद के बिना
निभ ही कैसे सकता है
कोई रिश्ता

…..उम्मीद के बिना तो
दान तक नहीं दिया जाता!

✍️ चिराग़ जैन

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