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तेल डलवाकर करेगा क्या?

सबसे पहले नोट बन्द हुए
फिर आई जीएसटी
फिर भी यदि परमात्मा ने
किसी के मन में
कमाने-खाने की हिम्मत भर दी
तो हमने उसकी दुकान सील कर दी।
दुकान बंद पड़ी है
काम चौपट है
ऐसे में पेट्रोल तिजोरी में भरेगा क्या
जब घर से निकलना ही नहीं है
तो गाड़ी में तेल डलवाकर करेगा क्या?

केंद्र में विपक्ष नहीं
राज्यों में कांग्रेस नहीं
फेसबुक लायक फेस नहीं
पीएम लायक बेस नहीं
जिसके समर्थन में सभा कर दे
वह भारी मतों से हार जाता है
सभा कांग्रेस की होती है
और भाजपाई बाज़ी मार जाता है
अब घास फूस जैसी बची कांग्रेस को भी
घूम घूम कर चरेगा क्या
जब घर से निकलना ही नहीं है
तो गाड़ी में तेल डलवाकर करेगा क्या?

✍️ चिराग़ जैन

महंगाई (पेट्रोल)

देश को सँवारने के क़ीमती ये दिन-रात
आप क्यों विपक्ष की नकेल में लुटा रहे
जनता के हाथों में से छीन के पुराने नोट
नए-नए नोट अब तेल में लुटा रहे
पार्टी को अरबों का दान जो मिला हुज़ूर
हाय उसे खच्चरों की सेल में लुटा रहे
थोक के व्यापार में कमाई हुई साख काहे
हर दो महीने में रिटेल में लुटा रहे

गाड़ी में नहीं है तेल, रोड पे नहीं है गाड़ी
इसलिए अब रोडरेज कम हो गया
लूटपाट की भी ख़बरों में कमी आ गई है
लॉन्ग ड्राइविंग वाला क्रेज कम हो गया
सड़कों के जाम से मुहाल था सफ़र अब
तेल के हुए जो दाम तेज, कम हो गया
बहुओं को फूंकने की हैसियत ही नहीं है
इसलिए ब्याह में दहेज कम हो गया

✍️ चिराग़ जैन

कैराना उपचुनाव

अक्ल समय पर आ जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती
हाथ बँटाते सब साथी, चिड़िया खेत न चुग के जाती

जनता की चिंता से पहले ही झोली भर लेते
आज किया है जो गठबंधन वो पहले कर लेते
तो ये आफत ना आती, चिड़िया खेत न चुग के जाती

चाचा और भतीजा है गए, ईगो वाले रोगी
गैया पाली अखिलेशों ने, दूध पी गए योगी
बूआ चौकस हो जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती

तोप दिखी तो एक हो गए, हँसिया, तीर, कटारे
बच कर रहना आपस में ही लड़ ना बैठें सारे
इनमें पहले बन जाती, चिड़िया खेत न चुग के जाती

✍️ चिराग़ जैन

प्यादे बदल गए

कल तक हुजूर दिखते थे सादे, बदल गए
हालात बदलते ही इरादे बदल गए
शतरंज की बिसात पर जो तेज़ चले थे
देखो वज़ीर में वही प्यादे बदल गए

✍️ चिराग़ जैन

चुनाव

“अगला चुनाव कब है?”
“नवंबर में होगा शायद।”
“कब से जुटना है?”
“जुलाई-अगस्त से शुरू करते हैं।”
“ठीक है, तब तक रूस घूम आता हूँ।”
“लेकिन पैसा कहां से आएगा।”
“ह्म्म्म….
पैट्रोल के दाम बढ़ा दो ना यार। ”

✍️ चिराग़ जैन

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