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आँसू की आवाज़

जो रैली में पींग बढ़ाते नारों की हालत देखो जाकर उन बेचारों की इंसानों की बस्ती भूखी बैठी है तुम बातें करते हो चाँद-सितारों की आँसू की आवाज़ छुपाकर रख पाएँ इतनी भी औक़ात कहाँ दीवारों की लहरों से कश्ती का हाथ छुड़ाना है हिम्मत बढ़ती जाती है पतवारों की सिगरेट को इक बार...

छल

आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है। ✍️ चिराग़...

कट्टरता

कट्टरता और परिपक्वता में केवल ‘भी’ और ‘ही’ का अन्तर है। ✍️ चिराग़ जैन

विजय का मंत्र

जो समर्पित हो गया मजबूर होकर वह तुम्हारा हित करेगा; भूल जाओ जो न अपने मन मुताबिक जी रहा हो वह तुम्हारे हित मरेगा; भूल जाओ कर्ण इक एहसान के वश में विवश थे द्रोण इक प्रतिशोध के कारण खड़े थे शल्य इक षड्यंत्र से आहत हुए थे भीष्म इक प्रण की विवशता में लड़े थे मन बचा पाया...

अहंकार का अंत

बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड, यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी, वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया, यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन, वह वनवासी महाकाल सिद्ध हो गया ✍️...
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