Protected: भरत मिलाप
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Chirag Jain Writings, Poetry, Purushottam
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Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जिस समय नल और नील समुद्र की लहरों को बांधकर सेतुनिर्माण कर रहे थे, उस समय रावण “भालू-बन्दरों की भीड़” कहकर रामदल का उपहास कर रहा था। यदि नल-नील ने उस उपहास का उत्तर देने में ऊर्जा निवेश की होती तो राम की सेना कभी सागर पार नहीं कर पाती।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
आदेशों का दास नहीं है शाखा का आकार कभी
ले तक सीमित मत करना पौधे का संसार कभी
जड़ के पाँव नहीं पसरे तो, छाँव कहाँ से पाओगे
जिस पर पंछी घर कर लें वो ठाँव कहाँ से लाओगे
बालकनी में बंध पाया क्या, बरगद का विस्तार कभी
कोंपल, बूटे, कलियाँ, डाली; ये सब कुछ आबाद रहे
तब ही आती है ख़ुशहाली, जब मौसम आज़ाद रहे
नभ में चहक नहीं भर सकता, पिंजरे का परिवार कभी
सीमा में जकड़े बिरवे की सहज सुगंध नदारद है
जो तितली की बाँह पकड़ ले, वो मकरंद नदारद है
नकली पेड़ों पर बरसा है, क्या बादल का प्यार कभी
नज़रों को दौड़ाना सीखो, विस्तारों को मत छाँटो
घर में चहक भरी रखने को, चिड़िया के पर मत काटो
पलकों में भर पाता है क्या, सूरज का उजियार कभी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
जो रैली में पींग बढ़ाते नारों की
हालत देखो जाकर उन बेचारों की
इंसानों की बस्ती भूखी बैठी है
तुम बातें करते हो चाँद-सितारों की
आँसू की आवाज़ छुपाकर रख पाएँ
इतनी भी औक़ात कहाँ दीवारों की
लहरों से कश्ती का हाथ छुड़ाना है
हिम्मत बढ़ती जाती है पतवारों की
सिगरेट को इक बार बुझाना उंगली से
गर तासीर समझनी है अंगारों की
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है।
✍️ चिराग़ जैन