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काँच

मैंने काँच से सीखा है कि दुनिया को सच दिखाने के लिए छोड़ना ही पड़ता है पारदर्शी स्वभाव ✍️ चिराग़...

विज्ञान

वास्तविकता साकार हो चुकी कल्पना है और कल्पना साकार होने जा रही वास्तविकता है। ✍️ चिराग़ जैन

ऊर्जा का सदुपयोग

जिस समय नल और नील समुद्र की लहरों को बांधकर सेतुनिर्माण कर रहे थे, उस समय रावण “भालू-बन्दरों की भीड़” कहकर रामदल का उपहास कर रहा था। यदि नल-नील ने उस उपहास का उत्तर देने में ऊर्जा निवेश की होती तो राम की सेना कभी सागर पार नहीं कर पाती। ✍️ चिराग़...

बोनसाई

आदेशों का दास नहीं है शाखा का आकार कभी ले तक सीमित मत करना पौधे का संसार कभी जड़ के पाँव नहीं पसरे तो, छाँव कहाँ से पाओगे जिस पर पंछी घर कर लें वो ठाँव कहाँ से लाओगे बालकनी में बंध पाया क्या, बरगद का विस्तार कभी कोंपल, बूटे, कलियाँ, डाली; ये सब कुछ आबाद रहे तब ही आती...
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