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उत्सव रूठ जाएगा

अगर व्यवधान होगा तो ये उत्सव रूठ जाएगा
कोई इक पल कई रातों की मेहनत लूट जाएगा
ये तनहाई की बातें आई हैं महफ़िल में हिम्मत से
हुई अनदेखी तो इनका मनोबल टूट जाएगा

✍️ चिराग़ जैन

ग़ज़लों की सादा बस्तियों को चूम आता हूँ

नज़र की शोख़ियों को, मस्तियों को चूम आता हूँ
जे़ह्न में तैरती कुछ कश्तियों को चूम आता हूँ
ठहाकों के मुहल्ले में सजी महफ़िल से उठकर मैं
हसीं ग़ज़लों की सादा बस्तियों को चूम आता हूँ

✍️ चिराग़ जैन

वंदना के गीत

जश्न में खोने से पहले दो घड़ी ख़ुद को जगा लें
उत्सवों की देहरी पर देवताओं को मना लें
मुस्कुराहट दिव्य हो जाएगी गर दो पल ठहर कर
उल्लसित होने से पहले वंदना के गीत गा लें

✍️ चिराग़ जैन

चुटकुला

मंच की आलोचना का बोझ भी ढोता रहा
और उसका मंच पर उपयोग भी होता रहा
हास्य कविता की शक़ल में चुटकुला जब भी ढला
तालियाँ तो पिट गईं पर चुटकुला रोता रहा
✍️ चिराग़ जैन

बेअदब

बड़ी अधूरी थी ये ज़िन्दगी जो अब न रही
तुम्हारा प्यार जो पाया तो कुछ तलब न रही

ग़ज़ल मैं तेरे अदब की मिसाल देता हूँ
तवायफ़ों के लबों पर भी बेअदब न रही

तुम्हारी ओर से भी नज़्ा्रे-इनायत तो हुई
मगर जब हमको ज़रूरत थी महज तब न रही

कोई उस जीत को पाकर भला करे भी क्या
जो जीत एक भी मुस्कान का सबब न रही

✍️ चिराग़ जैन

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