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हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं

हमारे मन में आशाएँ अलग हैं
मगर हाथों में रेखाएँ अलग हैं

हमारी अपनी सीमाएँ अलग हैं
तुम्हारी भी विवशताएँ अलग हैं

हमारी ख़ुद से तुलना मत करो तुम
हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं

करी है हमने सी.ए. की पढ़ाई
मगर अम्मा की गणनाएँ अलग हैं

असीमित स्वप्न बोए कल्पना ने
मगर अब वास्तविकताएँ अलग हैं

विषय-सूची में लिक्खा भाईचारा
मगर भीतर की शिक्षाएँ अलग हैं

जवानी का नशा ये याद रक्खे
बुढ़ापे की समस्याएँ अलग हैं
✍️ चिराग़ जैन

कोई बिछड़कर मिला है

जहाँ तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहाँ हमको जन्नत का मंज़र मिला है

उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तिरा दर मिला है

कहाँ कोई ऐसा क़लन्दर मिला है
जिसे मन मुताबिक़ मुक़द्दर मिला है

हुआ एक अरसे के बाद आज तनहा
लगा, जैसे कोई बिछड़कर मिला है

भले चोट की जिस्म पर दोस्तों ने
मगर ज़ख़्म उसका ज़ेह्न पर मिला है

कोई तेरी रहमत को माने न माने
तिरा नाम सबकी ज़ुबां पर मिला है

ज़माना भले उसको समझे न समझे
मगर इक इशारा बराबर मिला है

जिसे जो मिला है वो उसका मुक़द्दर
मुझे जो मिला है वो बेहतर मिला है

कोई उनसे पूछे मुक़द्दर के मानी
जिन्हें तिश्नगी में समन्दर मिला है

✍️ चिराग़ जैन

वनफूल

कुछ ज़र्द से पत्ते थे जो सजकर सँवर गए
कुछ फूल जंगलों में ही खिलकर बिखर गए
कुछ छाछ की छछिया लिए दुनिया पे छा गए
कुछ खीर हाथ में लिए घुट-घुट के मर गए

✍️ चिराग़ जैन

भाग्यवाद

यहाँ प्रारब्ध का लेखा सिकन्दर तक ने भोगा है
पड़ोसी की ख़ताओं को समन्दर तक ने भोगा है
बहुत चाहा बचाना राम ने रावण को मरने से
मग़र जो लिख गया वो तो कलन्दर तक ने भोगा है

✍️ चिराग़ जैन

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