Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
पाक की सियासत क़माल की सियासत है
सबकी बनाती है ये रेल, चले जाओगे
फाँसी, गोली, क़ैद, सज़ा यही मिलता है बस
निकलेगा आपका भी तेल चले जाओगे
खेल-खिलवाड़ नहीं ज़िन्दगी का दांव है ये
कस ली है नाक में नकेल चले जाओगे
कुछ रोज़ महलों का रंग ढंग देख लो जी
बाद में तो आप ख़ुद जेल चले जाओगे
भारत के वीर सैनिकों से सामना है अब
साज़िशें करीं तो नींबू से निचुड़ जाओगे
ज़्यादा फूल कर कोई भूल मत कर देना
इन्हें क्रोध आया तो वहीं सिकुड़ जाओगे
सैनिकों के साथ यदि मैच खेलने लगे तो
एक झटके में सबसे बिछुड़ जाओगे
बॉल छोड़ दी तो पाकिस्तान में धमाका होगा
बल्ले पे जो ली तो ख़ुद आप उड़ जाओगे
भारत से भूल के मुकाबला न कीजियेगा
आपके पीएम को दबोच लेंगे मोदी जी
आप जब तक शुरुआत भी नहीं करोगे
तब तक अंत को भी सोच लेंगे मोदी जी
लच्छेदार बातों के भरोसे मत रहिएगा
ताकते रहोगे ऐसी लोच लेंगे मोदी जी
नए पंछियों को कहिए कि घोंसले में रहें
उड़ने लगे तो पर नोच लेंगे मोदी जी
भारत की संसद की नींव न डिगा सकोगे
जनता को अभी संविधान पे भरोसा है
भूख के सवाल का जवाब खोज लेंगे हम
भारत को अपने किसान पे भरोसा है
आपस का सारा मतभेद भूल जाएंगे जी
राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान पे भरोसा है
दुश्मनों की साज़िशों से डरते नहीं हैं क्योंकि
सीमाओं पे जूझते जवान पे भरोसा है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Lapete Mein Netaji, Poetry
न्यायालय ने पूछा-
“पंद्रह दिन प्रतीक्षा कर लेंगे
तो क्या बिगड़ जाएगा?”
कांग्रेसी बोले-
“अठहत्तर विधायकों को
पन्द्रह दिन रेसोर्ट में रखने का
ख़र्चा बढ़ जाएगा।”
न्यायालय बोला – “विधायक घर पर रहें
तो इसमें क्या डर है?”
कांग्रेसी बोले- “कमाल करते हैं साहब
आपको पता नहीं
अमित शाह गश्त पर हैं!”
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
दक्षिण में कर्नाटक के रीयल नाटक का शोर रहा
उत्तर में सेना को देखा तो मंज़र कुछ और रहा
काशी में इक पुल टूटा जो पूरा आदमखोर रहा
नेताजी का केवल सत्ता हथियाने पर ज़ोर रहा
जब विधायकों की मंडी लगा ली, नियम की सुध ना ली
लीडर हुए मलंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
महबूबा की मांग नहीं ये कैकयी के वरदान हैं जी
जिन पर बंदिश ठोकी है वे अपने वीर जवान हैं जी
आतंकवादी को मत पकड़ो क्योंकि अब रमज़ान है जी
लकड़बग्घे ईद मनाएँ और बकरे कुर्बान हैं जी
अरे किस किस से दोस्ती बना ली, ये सत्ता की दलाली
बड़ी है बदरंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
ईद मनाने देना उनको सैनिक सारे चुप रहना
वो तुमको पत्थर मारे या थप्पड़ मारे चुप रहना
महबूबा मुफ्ती मैडम ने किए इशारे चुप रहना
56 इंची वाले फूट गए गुब्बारे चुप रहना
तुमने वीरों के बेड़ियां क्यों डाली, शोषण ही किया ख़ाली
कैसे जीतेंगे जंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
क्या सोचा था कानूनों की लाज करेगी भाजप्पा
नैतिकता की पारी का आग़ाज़ करेगी भाजप्पा
गोवा, मणिपुर भूल गए जो आज करेगी भाजप्पा
कितनी भी सीटें ले आओ राज करेगी भाजप्पा
राज्यपाल पे भी उंगली उठा ली, अदालत खुलवा ली
चला न कोई रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
अमित शाह घर से निकले तो ख़ौफ़ खा गए कांग्रेसी
अपने जीते हुए विधायक लुका छुपा गए कांग्रेसी
जेडीएस का सीएम बन जाए, इस पर आ गए कांग्रेसी
येदुरप्पा कुर्सी ले भागे गच्चा खा गए कांग्रेसी
हाय आगे से थाली उठा ली, छू भी न सके प्याली
सपना सा हुआ भंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
मोदी जी की लहर चल रही, योगी की आंधी आई
भूचालों की धमकी लेकर घूम रहे राहुल भाई
बिना बात के उठा बवंडर देते हैं हातिमताई
ये सब देखा तो तूफ़ां की ईगो भी कुछ टकराई
राजनीति ने आफत मचा ली, सुनामी उठा ली
तूफान हुआ तंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी हैं अब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
हमने तूफान को सचिन तेंदुलकर बना दिया :-
ट्रोलिंग की आंधी में दो दिन तूफानों का होल्ड हुआ
पब्लिक का कंसन्ट्रेशन भी वेदर के संग मोल्ड हुआ
पंखे का झोंका भी उस दिन तूफानों में सोल्ड हुआ
प्रेशर में आकर बेचारा ज़ीरो रन पर बोल्ड हुआ
ऐसी कूकर की सिटी निकाली, हवा हुई सवाली
चेहरे का उड़ा रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी हैं अब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
ट्विटर फेसबुक पर ट्रोलिंग का ऐसा अद्भुत खेल हुआ
इस्कूलों की छुट्टी हो गई इतना रेलमपेल हुआ
राई से तूफान बेचारा पर्वत तक इस्केल हुआ
दुनिया भर में शोर मचा पर दिल्ली आकर फेल हुआ
उसने केजरी से सीख यह पा ली, माफ़ी की धुन ली
लौटा यूँ ही बैरंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी हैं अब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
जनता के सेवक तो कर्नाटक दर्शन पर निकल गए
अन्ना जैसे वर्कर धरने और अनशन पर निकल गए
युवा अलीगढ़ में जिन्ना के निष्कासन पर निकल गए
डिक्लेअर करने वाले ही पर्यटन पर निकल गए
हमने आंधियों की हेकड़ी निकाली, यूँ पिकनिक मना ली
उठने न दी उमंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी हैं अब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
ढंग से आ भी जाता तो क्या पूँछ पाड़ता बेचारा
धूल सने सिस्टम की कितनी धूल झाड़ता बेचारा
भ्रष्टतंत्र के आख़िर कितने पृष्ठ फाड़ता बेचारा
उजड़े व्यापारों को और कितना उजड़ता बेचारा
उसने अपनी दिशा बदल डाली, मानवता निभा ली
भुला दो ये प्रसंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी हैं अब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
पिछला भी सप्ताह महज कानों कानों में बीत गया
कर्नाटक के नाटक में और हंगामों में बीत गया
सोनम की शादी के कुछ फिल्मी गानों में बीत गया
जिन्ना से जो वक़्त बचा था, तूफानों में बीत गया
कभी रैली में खिल्ली उड़ा ली, या खेला गाली गाली
ज़माना हुआ दंग भाइयो
डाँट डपट कर लोकतंत्र में लोग नहीं पाले जाते
गुंडागर्दी से सिस्टम के दोष नहीं टाले जाते
यदुरप्पा जी यूँ सत्ता के दीप नहीं बाले जाते
हाथ-पाँव बंध जाते हैं तो वोट नहीं डाले जाते
ढूंढो अपने दिमाग़ की भी ताली, चलाओ न दुनाली
उल्टी पड़ेगी जंग भाइयो
एक रोज़ कोई अधिकारी टीवी पर बड़बड़ा दिया
राई को बिन बात अचानक पर्वत जितना बढ़ा दिया
चैनल वैनल एफबी शेफबी क्या से क्या गुड़मुड़ा दिया
सच बतलाओ इस अंधड़ में कौन सा मुद्दा उड़ा दिया
हाय आंधियो की सूचना भुना ली, हवाएं बेच डालीं
ये कैसे हैं लफंग भाइयो
कसमें खाने से योद्धा का धीर टूटने लगता है
लक्ष्य भटक जाता है और उद्देश्य छूटने लगता है
कांग्रेस की फेयरवेल के मनसूबे मत पालो जी
पेड़ जहाँ से काटोगे वो वहीं फूटने लगता है
ऐसी चोटी में गाँठ क्यों लगा ली, कसम कोई खा ली
राहुल को किया तंग भाइयो
तुम निश्चय कर लेते तो फिर आड़ लगाना मुश्किल था
दुश्मन की जय कहने वालों का बच पाना मुश्किल था
देश, राज्य, मंत्रालय, कुलपति सब पर राज तुम्हारा है
फिर भी क्योंकर जिन्ना की तस्वीर हटाना मुश्किल था
बिना बात क्यों ये बात भी बढ़ा ली, ये है जनाबे आली
तुष्टिकरण का रंग भाइयो
वे बोले कि कर्नाटक में बहुमत इनका टच होगा
राहुल गांधी का भाषण अब सीरियसली टू मच होगा
मौसम का अनुमान तलक झूठा साबित हो जाता है
ऐसे में संजय राउत का दावा कैसे सच होगा
देखो ये तो पुलाव हैं खयाली, बिना हथेली ताली
ये बातों की है जंग भाइयो
सारे यार तुम्हारे उनके घर जा बैठे राहुल जी
कई राज्य अपनी ज़िद में तुम निपटा बैठे राहुल जी
कांग्रेस की सारी इज़्ज़त लुटवा बैठे राहुल जी
सिद्धरमैया भी मोदी के गुण गा बैठे राहुल जी
अपने हाथों से लुटिया डुबा ली, बजाते रहो ताली
चाकू पे लगा ज़ंग भाइयो
पिछला भी सप्ताह महज कानों कानों में बीत गया
कर्नाटक के नाटक में और हंगामों में बीत गया
सोनम की शादी के कुछ फिल्मी गानों में बीत गया
जिन्ना से जो वक़्त बचा था, तूफानों में बीत गया
कभी रैली में खिल्ली उड़ा ली, या खेला गाली गाली
ज़माना हुआ दंग भाइयो
डाँट डपट कर लोकतंत्र में लोग नहीं पाले जाते
गुंडागर्दी से सिस्टम के दोष नहीं टाले जाते
यदुरप्पा जी यूँ सत्ता के दीप नहीं बाले जाते
हाथ-पाँव बंध जाते हैं तो वोट नहीं डाले जाते
ढूंढो अपने दिमाग़ की भी ताली, चलाओ न दुनाली
उल्टी पड़ेगी जंग भाइयो
एक रोज़ कोई अधिकारी टीवी पर बड़बड़ा दिया
राई को बिन बात अचानक पर्वत जितना बढ़ा दिया
चैनल वैनल एफबी शेफबी क्या से क्या गुड़मुड़ा दिया
सच बतलाओ इस अंधड़ में कौन सा मुद्दा उड़ा दिया
हाय आंधियो की सूचना भुना ली, हवाएं बेच डालीं
ये कैसे हैं लफंग भाइयो
कसमें खाने से योद्धा का धीर टूटने लगता है
लक्ष्य भटक जाता है और उद्देश्य छूटने लगता है
कांग्रेस की फेयरवेल के मनसूबे मत पालो जी
पेड़ जहाँ से काटोगे वो वहीं फूटने लगता है
ऐसी चोटी में गाँठ क्यों लगा ली, कसम कोई खा ली
राहुल को किया तंग भाइयो
तुम निश्चय कर लेते तो फिर आड़ लगाना मुश्किल था
दुश्मन की जय कहने वालों का बच पाना मुश्किल था
देश, राज्य, मंत्रालय, कुलपति सब पर राज तुम्हारा है
फिर भी क्योंकर जिन्ना की तस्वीर हटाना मुश्किल था
बिना बात क्यों ये बात भी बढ़ा ली, ये है जनाबे आली
तुष्टिकरण का रंग भाइयो
वे बोले कि कर्नाटक में बहुमत इनका टच होगा
राहुल गांधी का भाषण अब सीरियसली टू मच होगा
मौसम का अनुमान तलक झूठा साबित हो जाता है
ऐसे में संजय राउत का दावा कैसे सच होगा
देखो ये तो पुलाव हैं खयाली, बिना हथेली ताली
ये बातों की है जंग भाइयो
सारे यार तुम्हारे उनके घर जा बैठे राहुल जी
कई राज्य अपनी ज़िद में तुम निपटा बैठे राहुल जी
कांग्रेस की सारी इज़्ज़त लुटवा बैठे राहुल जी
सिद्धरमैया भी मोदी के गुण गा बैठे राहुल जी
अपने हाथों से लुटिया डुबा ली, बजाते रहो ताली
चाकू पे लगा ज़ंग भाइयो
वही पुरानी काठ की हांडी नहीं चढ़ेगी साहब जी
जनता अपने अनुभव से ही निर्णय लेगी साहब जी
कर्नाटक की हार देखकर इतना तो सीखे होंगे
अब जुमलेबाज़ी से जनता नहीं फँसेगी साहब जी
अपनी ख़ुद की फेयरवेल करा ली, अपनी ही मुंह की खा ली
हारे हो बड़ी जंग भाइयो
घर से उठवाने के दावे को भी त्राटक नहीं मिला
उन्हें सड़क पर लाने वालों को ख़ुद फाटक नहीं मिला
हिन्दू-मुस्लिम, लिंगायत, जिन्ना, तूफान, दलित, अगड़े
इतना सारा नाटक करके भी कर्नाटक नहीं मिला
ईवीएम ने भी राखी खुलवा ली, नज़र फेर डाली
ठगे गए दबंग भाइयो
सच मानो पहले से अब मैच्योर हो गई है जनता
कांग्रेस-बीजेपी में इग्नोर हो गई है जनता
पहले जैसी नहीं रही है, और हो गई है जनता
जुमलों से और ड्रामे से अब बोर हो गई है जनता
जीडीएस ले ले सत्ता की ताली, तुम बैठे रहो ठाली
अब बदलो अपने ढंग भाइयो
✍️ चिराग़ जैन