Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
देश की आवाम को अमन की ज़रूरत है
इसे कोई फालतू बबाल नहीं चाहिए
शासक को चाहिए सुशासन बनाए रखे
व्यर्थ बकवाद, झोलझाल नहीं चाहिए
जनता को भरपेट रोटी चाहिए सुकूं की
धरना या भूख हड़ताल नहीं चाहिए
यदि संविधान का हो पूरी तरह पालन तो
फिर हमें कोई लोकपाल नहीं चाहिए
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
प्रशांतभूषण (अजीत)- “केजरी डर्लिंग, सारा शहर मुझे ऑनेस्ट के नाम से जानता है। अगर सारे स्टिंग हासिल करना चाहते हो, तो मेरी कुछ शर्तें माननी होंगी।”
अरविंद केजरीवाल (धर्मेन्दर)- “कुत्ते-कमीने मैं तेरा इस्तीफ़ा ले लूंगा।”
योगेन्द्र यादव (अमज़द ख़ान)- “अरे ओ केजरी! ई बैंगलोर वाले कौन चक्की काआटा खिलाते हैं रे। जब से लउटे हो ससुर गाली पर गाली दिये जात हो।”
मनीष सिसोदिया (नाना पाटेकर)- हा हा हा हा, हा हा हा हा। आ गए, आ गए हमारी बदनामी का तमाशा देखने। अब स्टिंग चला देंगे। असलियत ऐसी बाहर आयेगी, सच्चाई बाहर आएगी। थोड़ी देर स्टिंग चलता रहेगा। फिर मेरा भाई एंकर बुलेटिन बना लेगा। फिर सब चर्चा करके घर चले जाएँगे, खाना खाएंगे, सो जाएंगे। तुम्हारी ये योगेन्द्र यादवी, ये भूषणी एक दिन इस पार्टी की मौत का तमाशा इसी ख़ामोशी से देखेगी।
अन्ना हज़ारे (अमिताभ बच्चन)- आज ख़ुश तो बहुत होंगे तुम। देखो, जो आज तक किसी स्टिंग में नहीं दिखा, जिसने आज तक किसी को गाली नहीं दी, जिसने आज तक किसी सफ़ाई अभियान में हिस्सा नहीं लिया, वो आज जगह जगह सफ़ाई देता फिर रहा है।
जनता (प्राण) – साब! आज तक जनता से किसी ने इतना बड़ा धोखा नहीं किया। ये तुम नहीं तुम्हारी 67 सीटें, तुम्हारी कुर्सी बोल रही है। जिस दिन ये पॉवर ये कुर्सी नहीं होगी उस दिन तुम… (केजरी जी स्टिंग वाली भाषा में चिल्लाते हैं) …चिल्लाओ नहीं साहेब…… ख़ांसी उठ जायेगी।
नोट : पिक्चर अभी बाक़ी है मेरे दोस्त।
✍️ चिराग़ जैन
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दिल्ली का चुनाव
चुनाव नहीं
बबाल था
एक तरफ़ पूरी बीजेपी थी
एक तरफ़ केजरीवाल था।
बीजेपी ने अपने रास्ते में
पहली खाई तब खोदी
जब दिल्ली जैसे छोटे चुनाव के लिये
रामलीला मैदान से दहाड़े थे पीएम मोदी।
और जीती हुई बाज़ी
विरोधियों के हाथ में तब देदी
जब सबके मना करने के बावज़ूद
छाँट कर लाए अपनी बुआ, बेदी।
इस फ़ैसले के बाद
दिल्ली के सारे लीडर
विभीषण हो गये
और सफ़लता के रास्ते
जो सुगम थे, अब भीषण हो गये।
उस पर और भी महान
साध्वियों और महाराजों के बयान
ऊपर से बेलगाम
किरण बेदी जी की ज़ुबान।
दुर्भाग्य का मास्टर पीस
एनडीटीवी के रवीश
जो कसर रह गई थी
वो भी पूरी कर दी
मैडम बेदी की हक़लाहटों के गले में
कुटी हुई मुलहठी भर दी।
मनोज तिवारी की लफ़्फ़ाज़ी
अमित शाह की जुमलेबाज़ी
जीत के नशे से चढ़ा गुमान
नये मेहमानों के लिये पुराने साथियों का अपमान
दिल्ली के सांसदों की कार्यकर्ताओं पर पकड़
और विजय रथ पर सवार चेहरों की अकड़
इन सब प्रहारों से प्रतिष्ठा का क़िला ढह गया
और कार्यकर्ताओं की अनदेखी करता नेतृत्व
एक-एक वोट के लिये तरसता रह गया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
आडवाणी जी से बोले मोदी न निराश रहो
चार-पाँच साल की है बात चला जाऊँगा
जब मेरे शाह के वज़ीर हार मान लेंगे
आपको ही सौंप के बिसात चला जाऊँगा
वोट देने वाले सब लोग टापते रहेंगे
कर के मैं बड़ी-बड़ी बात चला जाऊँगा
भाजपाई सोचें उन्हें काशी जाना है कि काबा
मेरा क्या है मैं तो गुजरात चला जाऊँगा
दिल्ली के सीएम को मिली है जहाँ कोठी वहीं
रूठने मनाने वाला कक्ष भी बना लिया
केजरी ने बीच-बीच खांसने-खखारने को
मौसम सा अपने समक्ष भी बना लिया
दिल्ली जीतने के बाद बाकी देश की विधान
सभाओं को झाड़ुओं का लक्ष भी बना लिया
आप के ख़िलाफ़ कोई बोल नहीं पा रहा था
आप ने ख़ुद अपना विपक्ष भी बना लिया
मोदी जी के जादू का सुरूर सा उतर गया
नुकसान हुआ भरपाई का अभाव है
भाजपाइयों की चैन भरी नींद उड़ गई
कांग्रेसियों को तो जम्हाई का अभाव है
सिस्टम को ऊपरी कमाई का अभाव और
जनता को मुफ्त वाई-फाई का अभाव है
जिसने गलीचा सा बिछा दिया था भारत में
उसे राजधानी में चटाई का अभाव है
अधिसूचना के दिन प्रेमी ने हिदायत दी
सावधान रहो प्रेम से है बड़ी जनता
प्रेमिका ने पूछा काहे रैलियों में कोसा मोहे
प्रेमी बोला यही सुनने पे अड़ी जनता
वोटिंग के दिन प्रेमी प्रेमिका से लड़ पड़ा
उन्हें देखकर आपस में लड़ी जनता
परिणाम बाद प्रेमी सीना चौड़ा कर बोला
गठजोड़ कर लो कुएं में पड़ी जनता
लोकसभा वाले जो चुनाव थे वहां तो मेरे
नाम का ही जलवा चला था भाई-बहनो
कांग्रेसी शासन की ठगी हुई जनता को
हाथ का निशान तो खला था भाई-बहनो
चाय के पतीले में पका के जाति वाला तेल
पीएम के पद को तला था भाई-बहनो
अच्छे दिन, काले धन की न अब आस रखो
वह तो चुनावी जुमला था भाई बहनो
✍️ चिराग़ जैन