चुनाव
“अगला चुनाव कब है?”
“नवंबर में होगा शायद।”
“कब से जुटना है?”
“जुलाई-अगस्त से शुरू करते हैं।”
“ठीक है, तब तक रूस घूम आता हूँ।”
“लेकिन पैसा कहां से आएगा।”
“ह्म्म्म….
पैट्रोल के दाम बढ़ा दो ना यार। ”
✍️ चिराग़ जैन
“अगला चुनाव कब है?”
“नवंबर में होगा शायद।”
“कब से जुटना है?”
“जुलाई-अगस्त से शुरू करते हैं।”
“ठीक है, तब तक रूस घूम आता हूँ।”
“लेकिन पैसा कहां से आएगा।”
“ह्म्म्म….
पैट्रोल के दाम बढ़ा दो ना यार। ”
✍️ चिराग़ जैन
हाथी ने पेड़ के नीचे सो रहे चार चूहों को अपनी ताकत के मद में कुचल दिया। जंगल की पुलिस ने अदालत में हाथी पर मुक़द्दमा दायर किया। चूहों की औकात के मुताबिक़ मुक़द्दमा धीमी गति से चलता रहा और हाथी आराम से जंगल में ज़िन्दगी बसर करता रहा। इस बीच जंगल में चुनाव हुए और राजा के सिंहासन पर लकड़बग्गा बैठ गया।
हाथी ने मौक़ा देखते ही लकड़बग्गे से दोस्ती गाँठनी शुरू कर दी। वह एक शिष्ट नागरिक की तरह नवनिर्वाचित राजा के शपथग्रहण में समय से पूर्व खड़ा मिला। राजा ने जब भी कोई योजना या अभियान चलाया तो हाथी कार्यकर्ता की तरह ज़मीन पर लेट-लेटकर राजा के अभियान में भाग लेने लगा। इस बीच चूहोंवाले मुक़द्दमे के फैसले की घड़ी आ गई। सारे जंगल में चर्चा थी कि हाथी को फाँसी होगी। भयभीत हाथी ने राजा से अपनी वफ़ादारी का फल मांगा।
राजा ने चूहों की वोटिंग वेल्यू, हाथी की फेस टीआरपी और अपनी लोकप्रियता के ग्राफ़ का हिसाब लगाया और न्यायालय ने जादुई तरीके से सबूतों के अभाव में हाथी को निर्दाेष साबित कर दिया।
सारा जंगल देखता रह गया। अदालत की काफ़ी थू-थू हुई। दबे स्वरों में कुछ जानवरों ने राजा की भी निंदा की। राजा को महसूस हुआ कि इस मामले में हस्तक्षेप करके, उसने अपनी लोकप्रियता को हानि पहुँचाई है। राजा ने हाथी को बोला अब मुझसे मिलना-जुलना कुछ कम करो। अहसानमंद हाथी ने राजा की बात मान ली। अब हाथी राजा के किसी अभियान में दिखाई नहीं देता था।
इसी बीच हाथी का एक और पुराना पाप उघड़ आया। उसने सालों पहले खरगोशों के दो बच्चे मनोरंजन के लिए मार दिए थे। यह मुक़द्दमा भी अपनी कछुआ चाल से धीरे-धीरे टल रहा था। अब इसके फ़ैसले की घड़ी आ गई। हाथी ने पहले की तरह लकड़बग्गे से मिलने की कोशिश की लेकिन राजा के निर्देश की वजह से मुलाक़ात संभव न हो सकी। हाथी इस उम्मीद में बैठा रहा कि राजा अपने वफ़ादार को दोबारा वफ़ादारी का इनाम देगा।
उधर राजा ने फिर हिसाब लगाया। सबसे पहली बात तो यह कि तीन महीने बाद खरगोशिस्थान में चुनाव हैं। वहाँ खरगोशों के काफ़ी वोट हैं। खरगोश समुदाय वैसे ही लकड़बग्गे की सरकार से नाराज़ है। अगर हाथी को सज़ा हो गई तो खरगोशों की वोट लकड़बग्गे की पार्टी को मिल जाएंगी। फिर पिछली बार चूहोंवाले केस में हुए फैसले से जो इमेज डैमेज हुई थी, वह भी बैलेंस हो जाएगी। सारा गणित लगाकर लकड़बग्गा सो गया।
सुबह अदालत का फैसला आया। पूरे जंगल को उम्मीद थी कि हाथी को अधिकतम तीन साल की सज़ा होगी लेकिन अदालत ने हाथी को पाँच साल की सज़ा सुनाई।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जंगल में न्याय उसे कहा जाता है जिसके होने से लकड़बग्गे को ज़्यादा वोट मिल जाएँ। बाकी सब अन्याय है।
✍️ चिराग़ जैन
कबिरा लुकाठी लेकर बाज़ार की ओर गया। उसे देखकर अपना घर फूँकने को प्रेरित हुए कुछ नवयुवक उसके साथ हो लिए। बीच बाज़ार खड़े होकर कबिरा ने लड़कों से पूछा- ‘बॉयज़, आर यू रेडी टू सेट फायर ऑन योर ओन हाउस?’
लड़के जोश में आकर बोले- ‘यस सर!’
कबिरा बोला- ‘ओके, गेट रेडी विद योर लुकाठी।’
लड़के निराश होकर बोले- ‘बट वी डोंट हेव लुकाठी विद अस!’
कबिरा मुस्कुराहट छुपाते हुए बोला- ‘डोंट वरी जेंटलमेन, आई विल अरेंज अ हॉट लुकाठी फ़ॉर यू।’
लड़के कृतार्थ भाव से बोले- ‘सो नाइस ऑफ यू सर!’
‘बट इट विल कॉस्ट फाइव हंड्रेड रूपीज़ ईच।’ -कबिरा ने मौके पर चौका मारा।
कबिरा ने पाँच-पाँच सौ रुपये सबसे ऐंठे। फिर सबके हाथ में लुकाठियाँ थमाकर अपने घर चला गया और अपने एसी बेडरूम में लेटकर ‘हाउस बर्निंग शो’ का लाइव टेलीकास्ट देखता-देखता सो गया।
✍️ चिराग़ जैन
नोटबंदी की आठवें दिन मैं अपने मकान मालिक को किराया देने पहुँचा तो मकान मालिक अड़ गया, बोला ‘मैं तो कैश ही लूंगा।’ मैंने कहा कि बैंक से पैसे निकल नहीं पा रहे हैं और वैसे भी अब प्रधानमंत्री जी ने नक़द लेनदेन से बचने की अपील की है।
मकान मालिक नहीं माना और बोला ‘मैं तो कैश ही लूंगा, कैश न दे सको तो मकान खाली कर दो।’
मुझे इस ज़िद्दी रवैये पर बहुत क्रोध आया और मैंने पुलिस को फोन मिलाया।
पुलिसवाला आया और दोनों को सामने बैठा कर बोला- “मैं भी कैश ही लूंगा।”
✍️ चिराग़ जैन
एक शरारती लड़का पूरे मोहल्ले के लोगों को तंग करता रहता था। वो रात में चैन से सोते लोगों के घर की घंटी बजाकर भाग जाता था। कई बार उसे समझाया गया। पंचायत में भी उसे टोका गया। लेकिन वो समझने को तैयार नहीं था। रोज़ की तरह एक दिन वह किसी की घंटी बजाने की सेंध लगाए बैठा था। उसी मौके का लाभ उठाकर एक दबंग पड़ोसी ने उस शरारती लड़के के घर पर खुजली का पाउडर बिखेर दिया। सूना है कि वो लड़का गाँव के जोहड़ में खुजा-खुजा कर खूनमखून बरामद हुआ है।
✍️ चिराग़ जैन
मोदी जी – “नवाज़ साहब, आप ये बार बार सीमा की शांति क्यों भंग करते हो?”
नवाज़ – “अरे मोदी जी, हमारे यहाँ 8 राज्य हैं, उनमें चुनाव होते हैं तो जनता का समर्थन जुटाने के लिए हमें भारत से छेड़ छाड़ करनी पड़ती है।”
मोदी जी – “ऐसा करके क्या सचमुच चुनाव जीता जा सकता है?”
नवाज़ – “100℅”
मोदी जी – “तो बेट्टा, अब तू देख। हमारे यहां 29 तो राज्य हैं, फिर 7 केंद्र शासित प्रदेश, फिर राज्यसभा के चुनाव, फिर नगर निगम …और हम तो यूनिवर्सिटी इलेक्शन तक को सीरियसली लेते हैं। तुम छेड़छाड़ की बात कर रहे हो हम तो छू छू कर ही मार डालेंगे।”
✍️ चिराग़ जैन