धर्म की राजनीति और राजनीति का धर्म
जो चांद करवा चौथ का अर्घ्य लेता है
वही ईद की इत्तिला भी देता है
क्योंकि चांद को वोट नहीं चाहियें
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जो चांद करवा चौथ का अर्घ्य लेता है
वही ईद की इत्तिला भी देता है
क्योंकि चांद को वोट नहीं चाहियें
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
भारत एक ऐसा उपवन है जहाँ अलग-अलग रंग के फूल खिलते हैं। हमें उन व्यापारियों की कोई ज़रूरत नहीं है, जो फूलों को डालियों से अलग करके बाज़ार में बेच दें। हमें तो वह माली चाहिए जो अलग-अलग रंग के फूलों को करीने से लगाकर बगीचे की सुंदरता बढ़ा सके।
हमें ऐसे बहुत सारे चैनल नहीं चाहियें जो समाज में परस्पर द्वेष की भावना भरकर आग भड़काएँ, हमारे लिए वह एक चैनल पर्याप्त है जो प्यार और भाईचारे का संदेश देकर देश को मिल-जुलकर रहना सिखाए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
शिखरों के तो आँसू भी मीठी नदी बनकर प्यास के ओंठ तर करने के काम आते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
पत्रकारिता जिस घटना की देह लिखती है, कविता उसी घटना की आत्मा लिखती है.
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose, Quotation
किसी ने मोदी जी से पूछा कि अंतरिक्ष में क्या मिलेगा?
मोदी जी बोले – ‘मेरी बातें’!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
ऐश की ज़िंदगी जीने की लालसा है तो आराम को त्यागना ही होगा। ऐश और आराम परस्पर विरोधी परिस्थितियां हैं।
✍️ चिराग़ जैन