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भाजपा आ गई

एक समय था
जब मीडिया वाले भी सच बोलते थे
सरकारी घोषणाओं की कलई खोलते थे
फिर हर तरफ बस एक ही तस्वीर छा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई

विश्वास करो भाईसाहब
पैट्रोल पंप पर सिर्फ़ ईंधन का व्यापार होता था
फिर आ गई भाजपा
अब वहाँ भी साहिब का प्रचार होता था

ईडी और सीबीआई
लोकतंत्र के सिपाही थे
अपराध और भ्रष्टाचार के लिए तबाही थे
फिर आ गई भाजपा
अब इनके रिमोट ख़ुद जिल्ले-इलाही थे
जो हमसे पंगा ले
उसी को रगड़ दो
कैसे भी करके उस पर एक चार्जशीट जड़ दो
बाद में कोर्ट में डाँट पड़ती हो
तो पड़ने दो
विपक्ष को जेल में सड़ने दो

ख़ुद भाजपा के कार्यकर्ता
सारी ज़िन्दगी मेहनत करते थे
कि कभी तो उनके भी झंडे तनेंगे
आडवाणी जी को उम्मीद थी
कि एक दिन वो कुछ बनेंगे
फिर देश में भाजपा आ गई
सारी उम्मीदों पर पानी फिरा गई

पहले रेलमंत्री रेल का उद्घाटन करते थे
विदेश मंत्री विदेशों में विचरते थे
फिर हर मंत्रालय की योजनाओं पर
एक ही तस्वीर छप-छपा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई

मंदिर, पद्मावत जैसे मुद्दे छाने लगे
महँगाई को विकास बताने लगे
रोज़गार, ग़रीबी जैसे मुद्दों को
गाय माता चबा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई

पहले उद्योगपतियों के टैक्स के पैसे से
सरकार भरती थी घाटा
लेकिन फिर लोकहित को करके टाटा
सरकारी कंपनियाँ
उद्योगपतियों की जेब में समा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई।

आते हुए जो सड़क बनी थी
वो जाने से पहले ही लड़खड़ा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई

संसद लीक, पेपर लीक
एयरपोर्ट की छत धड़ाम
खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान सड़क पर
अधबने मंदिर में श्रीराम
करोड़ों की मूर्ति ध्वस्त
साहिब फोटो खिंचवाने में मस्त
दो-दो इंजन के बाद भी
ट्रेन पटरी को ठेंगा दिखा गई
कमाल ही हो गया
इस देश में भाजपा आ गई

✍️ चिराग़ जैन

मध्यम वर्ग की पीड़ा

तुम लड़ते रहे चुनाव, ओ साब
मेरी थाली खाली है रही है

मुझसे टैक्स वसूला जाए, उन्हें चढ़ावा जाए
मैं देकर भी झिड़की खाऊँ, वो खाकर गुर्राए
वो मुझे दिखावें ताव, ओ साब
मेरी जेब मवाली है रही है

मध्यम वर्ग बनाकर मुझको, दोनों ओर निचोड़ा
इन्हें दान दो, उन्हें मान दो, नहीं कहीं का छोड़ा
मेरा बढ़ता रहा अभाव, ओ साब
वहाँ रोज़ दीवाली है रही है

जीएसटी ने पहले सों ही इनकम कम कर राखी
रोड टैक्स देकर भी ससुरा टोल रह गया बाकी
मेरा कैसे होय बचाव, ओ साब
हर दिन बदहाली है रही है।

✍️ चिराग़ जैन

बजट 2024

मैंने सरकार से पूछा
जब एक लाख सालाना आय वाले
पैसे मांगने आए
तो आप क्या कर लेंगे
सरकार बोली करना क्या है
हम उन्हें जॉब देने वालों को
न्यूनतम वेतन कानून उल्लंघन का
चार्ज लगाकर धर लेंगे

हमने पूछा
ये इंटर्नशिप की योजना में तो काफी लोचा है
क्या आपने सोचा है
लोग नकली इंटर्नशिप दिखाकर
पाँच हज़ार रुपये महीने का दावा करेंगे सरकार से
सरकार ने हमें समझाया प्यार से
देखो इस स्कीम में सबकी भलाई है
इसमें बेरोज़गारों के हिस्से छाछ
और उद्योगपतियों के हिस्से मलाई है
उद्योगपति नई भर्ती इंटर्नशिप के नाम पर भरेगा
और 5000 रुपये महीना
अपने CSR FUND से भरेगा
नया रंगरूट 5000 रुपये कमाकर लाएगा
और ख़ुद को बेरोजगार भी नहीं कह पाएगा
तो हुई ना बात सबके अधिकार की
CSR उद्योगपति का
Job उद्योगपति की
और वाहवाही सरकार की

लेकिन जनाब
इससे पुराने employee की हालत हो जाएगी ख़राब
सरकार बोली
हमने नए रोज़गार देने का वादा किया था
पुराने रोयेंगे तो उन्हें भी देख लेंगे
अगले बजट में नयों की पट्टी खोलकर
पुरानों पर लपेट देंगे।

✍️ चिराग़ जैन

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