आधुनिकता और संस्कार
छोटी बहू के
घूंघट न काढ़ने की आदत
सासू को अखरती है
और बड़ी बहू
लम्बे से घूंघट में मोबाइल छिपाकर
आराम से
वीडियो काॅल करती है
✍️ चिराग़ जैन
छोटी बहू के
घूंघट न काढ़ने की आदत
सासू को अखरती है
और बड़ी बहू
लम्बे से घूंघट में मोबाइल छिपाकर
आराम से
वीडियो काॅल करती है
✍️ चिराग़ जैन
एक समय था
जब मीडिया वाले भी सच बोलते थे
सरकारी घोषणाओं की कलई खोलते थे
फिर हर तरफ बस एक ही तस्वीर छा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई
विश्वास करो भाईसाहब
पैट्रोल पंप पर सिर्फ़ ईंधन का व्यापार होता था
फिर आ गई भाजपा
अब वहाँ भी साहिब का प्रचार होता था
ईडी और सीबीआई
लोकतंत्र के सिपाही थे
अपराध और भ्रष्टाचार के लिए तबाही थे
फिर आ गई भाजपा
अब इनके रिमोट ख़ुद जिल्ले-इलाही थे
जो हमसे पंगा ले
उसी को रगड़ दो
कैसे भी करके उस पर एक चार्जशीट जड़ दो
बाद में कोर्ट में डाँट पड़ती हो
तो पड़ने दो
विपक्ष को जेल में सड़ने दो
ख़ुद भाजपा के कार्यकर्ता
सारी ज़िन्दगी मेहनत करते थे
कि कभी तो उनके भी झंडे तनेंगे
आडवाणी जी को उम्मीद थी
कि एक दिन वो कुछ बनेंगे
फिर देश में भाजपा आ गई
सारी उम्मीदों पर पानी फिरा गई
पहले रेलमंत्री रेल का उद्घाटन करते थे
विदेश मंत्री विदेशों में विचरते थे
फिर हर मंत्रालय की योजनाओं पर
एक ही तस्वीर छप-छपा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई
मंदिर, पद्मावत जैसे मुद्दे छाने लगे
महँगाई को विकास बताने लगे
रोज़गार, ग़रीबी जैसे मुद्दों को
गाय माता चबा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई
पहले उद्योगपतियों के टैक्स के पैसे से
सरकार भरती थी घाटा
लेकिन फिर लोकहित को करके टाटा
सरकारी कंपनियाँ
उद्योगपतियों की जेब में समा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई।
आते हुए जो सड़क बनी थी
वो जाने से पहले ही लड़खड़ा गई
क्योंकि देश में भाजपा आ गई
संसद लीक, पेपर लीक
एयरपोर्ट की छत धड़ाम
खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान सड़क पर
अधबने मंदिर में श्रीराम
करोड़ों की मूर्ति ध्वस्त
साहिब फोटो खिंचवाने में मस्त
दो-दो इंजन के बाद भी
ट्रेन पटरी को ठेंगा दिखा गई
कमाल ही हो गया
इस देश में भाजपा आ गई
✍️ चिराग़ जैन
To view this protected post, enter the password below:
To view this protected post, enter the password below:
तुम लड़ते रहे चुनाव, ओ साब
मेरी थाली खाली है रही है
मुझसे टैक्स वसूला जाए, उन्हें चढ़ावा जाए
मैं देकर भी झिड़की खाऊँ, वो खाकर गुर्राए
वो मुझे दिखावें ताव, ओ साब
मेरी जेब मवाली है रही है
मध्यम वर्ग बनाकर मुझको, दोनों ओर निचोड़ा
इन्हें दान दो, उन्हें मान दो, नहीं कहीं का छोड़ा
मेरा बढ़ता रहा अभाव, ओ साब
वहाँ रोज़ दीवाली है रही है
जीएसटी ने पहले सों ही इनकम कम कर राखी
रोड टैक्स देकर भी ससुरा टोल रह गया बाकी
मेरा कैसे होय बचाव, ओ साब
हर दिन बदहाली है रही है।
✍️ चिराग़ जैन
मैंने सरकार से पूछा
जब एक लाख सालाना आय वाले
पैसे मांगने आए
तो आप क्या कर लेंगे
सरकार बोली करना क्या है
हम उन्हें जॉब देने वालों को
न्यूनतम वेतन कानून उल्लंघन का
चार्ज लगाकर धर लेंगे
हमने पूछा
ये इंटर्नशिप की योजना में तो काफी लोचा है
क्या आपने सोचा है
लोग नकली इंटर्नशिप दिखाकर
पाँच हज़ार रुपये महीने का दावा करेंगे सरकार से
सरकार ने हमें समझाया प्यार से
देखो इस स्कीम में सबकी भलाई है
इसमें बेरोज़गारों के हिस्से छाछ
और उद्योगपतियों के हिस्से मलाई है
उद्योगपति नई भर्ती इंटर्नशिप के नाम पर भरेगा
और 5000 रुपये महीना
अपने CSR FUND से भरेगा
नया रंगरूट 5000 रुपये कमाकर लाएगा
और ख़ुद को बेरोजगार भी नहीं कह पाएगा
तो हुई ना बात सबके अधिकार की
CSR उद्योगपति का
Job उद्योगपति की
और वाहवाही सरकार की
लेकिन जनाब
इससे पुराने employee की हालत हो जाएगी ख़राब
सरकार बोली
हमने नए रोज़गार देने का वादा किया था
पुराने रोयेंगे तो उन्हें भी देख लेंगे
अगले बजट में नयों की पट्टी खोलकर
पुरानों पर लपेट देंगे।
✍️ चिराग़ जैन