नज़रिया
मुझे इन्सान चारों ओर नज़र आता है
अक्स अपना ही तो हर ओर नज़र आता है
ये दुनिया शायद आइनों की इक इमारत है
तुझे हर शख्स यहाँ चोर नज़र आता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
मुझे इन्सान चारों ओर नज़र आता है
अक्स अपना ही तो हर ओर नज़र आता है
ये दुनिया शायद आइनों की इक इमारत है
तुझे हर शख्स यहाँ चोर नज़र आता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Jainism, Poetry
बारूदों के ढेर पर दुनिया खड़ी है देखो
ज़ख़्मों का एक ही इलाज है अहिंसा
धाँय-धाँय, धड़-धड़, धूम-धूम की ध्वनि में
वीणा के सुरों-सा एक साज है अहिंसा
तोप-टैंक-बम-परमाणुओं की कुण्डली में
साढ़ेसाती जैसी एक गाज है अहिंसा
ऐरों-गैरों-नत्थूखैरों-कायरों का काम नहीं
वीर-महावीरों की आवाज़ है अहिंसा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
बरसों से बरसते हैं अब क्या असर करेंगे
बेबस ये बसेरे हैं कैसे बसर करेंगे
रुकती है नज़र जाकर चूते हुए छप्पर पे
छप्पर को भी गिरा दो खुलकर सबर करेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
तनहा-तनहा था सफ़र क्या कहिए
आपका साथ मगर क्या कहिए
मुझको मूरत में कर दिया तब्दील
तेरे हाथों का हुनर क्या कहिए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
सर्किट के सीने में हुई
गड़बड़ का असर
उपकरण पर भी
समान रूप से पड़ा
लेकिन इन दोनों के बीच
बेचारा वायर
अकारण ही सड़ा।
तार बेचारा
सदैव अपना कार्य
सुचारू रूप से करता है
लेकिन जब भी कुछ प्रॉब्लम होती है
तो उसको जलना ही पड़ता है।
रिश्तों के कनेक्शन में हुए
झगड़ों के शॉर्ट-सर्किट से
विश्वास का वायर जल जाता है
और वक़्त का मैकेनिक
उपकरण और सर्किट को बचाने के लिये
बीच के वायर को बदल जाता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
फिर अंधेरा निगल गया सूरज
फिर चिराग़ों को खल गया सूरज
चंद पहरों की ज़िन्दगानी में
कितने चेह्रे बदल गया सूरज
गर हुआ ऑंख से ज़रा ओझल
लोग कहते हैं ढल गया सूरज
रात गहराई तो समझ आया
सारी दुनिया को छल गया सूरज
आज फिर रोज़ की तरह डूबा
कैसे कह दूँ सँभल गया सूरज
✍️ चिराग़ जैन