Blank Verse, Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Poetry
हर पेशे की अपनी-अपनी ब्यूटी है
हर पेशे की अपनी-अपनी ड्यूटी है
हमें अक्सर
सामने वाले का पेशा
मज़ेदार लगता है
क्योंकि उसका सच
हमसे दूर होता है,
लेकिन हर पेशे में
कभी न कभी आदमी
बहुत मजबूर होता है।
जब कोई जज
किसी की ज़िन्दगी का
फैसला लिखता है
तो वो ऊपर से
बहुत आत्मविश्वासी दिखता है
लेकिन भीतर ही भीतर
उसका पसीना छूटता है
फैसले के बाद
कलम ही नहीं टूटती
फैसला लिखने वाला भी टूटता है
हर सर्जरी के बाद
जब तक मरीज़ का
जीवन संघर्ष चलता है
सर्जरी करने वाला डाॅक्टर भी
रात-रात भर करवटें बदलता है
सर्जरी से पहले
मरीज़ ही नहीं डरता
डाॅक्टर भी डरता है
और ज़रा-सी ग़लती होने पर
मरीज़ ही नहीं मरता
कुछ हिस्सों में
डाॅक्टर भी मरता है
सर्कस का जोकर
अपनी पीड़ा जता नहीं सकता
सीमा पर खड़ा जवान
अपनी समस्या बता नहीं सकता
फाँसी पर लटका इन्सान
जब धरती से दो फुट ऊपर
फड़फड़ाता होगा
तो एक बार तो
जल्लाद का कलेजा भी
हिल जाता होगा
लेकिन कोई फ़र्क नहीं पड़ता उनको
जो नफ़रत की फ़सल उगाते हैं
कलेजा नहीं थर्राता है उनका
जो नौजवानों को आतंकी बनाते हैं
दिल नहीं दहलता
लाशों के ढेर पर
राजनीति करने वालों का
दर्द नहीं दिखता है उन्हें
तड़प-तड़प कर
भूख से मरने वालों का
मुझे समझ नहीं आता है यार
कि हमनें क्यों उगाए हैं
नफ़रत के देवदार
दर्द, कराह और डर क्यों फैलाते हैं
हम सुख और चैन से रहना
क्यों नहीं सीख पाते हैं
मुझे यकीन है
कि जब तक आदमी में इंसान है
तब तक ज़िन्दगी बहुत आसान है
और जैसे ही हमारे भीतर का इंसान
मर जाता है
आदमी आसानी की सीमाओं से
आगे निकल जाता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
राजकुमारी ने कहा-
‘बहुत नसीब वाला होगा
वो चांद
जो उतरेगा
तुम्हारे अंगना।
रे पथिक!
मेरा ऐसा नसीब कहाँ
जो पा सकूँ
तुम-सा
स्वतंत्र
और स्वच्छंद साथी!’
पथिक
कोसता रहा गया
अपनी ख़ुशनसीबी को
और राजकुमारी
सोने की पालकी में बैठ
उतर गई
किसी चांद के अंगना।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
दुःख का अभाव
सुख नहीं है।
मुश्किल की अनुपस्थिति
आसानी नहीं है।
दरअस्ल
आसान तो
कुछ है ही नहीं
जीवन एक अवसर है
कम मुश्किल का
चयन करने के लिए।
मुझे चुनना था
दो में से एक वाक्यांश-
“काश ये न होता!”
या
“काश वो होता!”
मैंने दूसरा विकल्प चुना।
सुखी हूँ या नहीं
कह नहीं सकता
लेकिन
दुःखी बिल्कुल नहीं हूँ।
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Poetry
अबे 2012!
तेरे जैसा साल न आए दोबारा।
तूने तो पूरा देश ही निपटा मारा
सबसे पहले तो छीना
कुश्ती का सितारा
एक्टिंग का किंग
यानि दारा सिंह
अभी दारा की याद को भूले भी नहीं थे अख़बार
तब तक हमें अलविदा कह गए राजेश खन्ना
यानि पहले सुपरस्टार
फिर लगते रहे एक के बाद एक घाव
मुम्बई में विलासराव
उसके बाद ए के हंगल
फिर बेस्ट डायरेक्टर यश अंकल
मन करता था बीच में ही कर दें तुझसे कट्टी
तब तक रोड एक्सिडेंट में मारे गए
कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
फिर तेरी भेंट चढ़ा बाल ठाकरे जैसा लाल
फिर इंद्र कुमार गुजराल
तू साले साल था, या काल
दिसम्बर में भी तूने छोड़ा नहीं अपना गुर
छीन लिए पंडित रविशंकर
ग़ायब हो गए सितारों से सुर
इतने पर भी भरा नहीं तेरा कोष
दिल्ली में वहशियों की भेंट चढ़ गई
एक तेईस साल की निर्दोष
इसके अलावा भी
कुछ अच्छा नहीं रहा तेरा बीहेव
तूने ही लील लिए संघ के सुदर्शन
और आस्था के जय गुरुदेव
जो तुझसे बचे
उनकी भी हालत अच्छी नहीं है भाई
राम ही जाने कैसे होगी इसकी भरपाई
सचिन ने वन डे में जाना छोड़ दिया
लता मंगेशकर ने गाना छोड़ दिया
रतन टाटा ने कमाना छोड़ दिया
अन्ना ने आवाज़ उठाना छोड़ दिया
और सातवें सिलैण्डर ने रसोई में आना छोड़ दिया
वाह रे काले कालखण्ड
इतिहास निर्धारित करेगा तेरा दण्ड
अच्छा हुआ तू बीत गया
तुझे अंदाज़ा नहीं है
कि तेरे रहते कितना कुछ रीत गया
काश ऐसा साल
फिर कभी जीवन में न आए
जाते-जाते तू हमसे ले ले
फाइनल गुड बाय!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
जिस डाली का काटा जाना आज अखर जाता है तुमको
उस डाली के कटने से ही कल को तुम फलदार बनोगे
जिस छैनी के छूने भर से चीख़ निकलती है पत्थर की
उस छैनी की चोटों से तुम पूजा के हक़दार बनोगे
अनुभव के दो हाथ समूचे माटी-माटी सन जाएंगे
तब जाकर मिट्टी के ढेले को किंचित आकार मिलेगा
मिट्टी से पहले हाथों की भाग्य लकीरें घिस जाएंगी
तब बर्तन कहला पाने का मिट्टी को अधिकार मिलेगा
जिन जलते शोलों से तन-मन सब कुछ झुलसेगा भीतर तक
उनके कारण ही तुम प्यासे ओंठों पर बौछार बनोगे
गंगा बनकर पुजना है तो, गोमुख से झरना ही होगा
बूंदों को बारिश बनना है, बादल को मरना ही होगा
रामशरण स्वीकार नहीं हो, और मुक्ति की इच्छा हो तो
कंचन मृग का स्वांग रचा कर, सीता को हरना ही होगा
अपने सारे सुख को अपने हाथों वनवासी कर दोगे
तब सम्भव है तुम जीते जी धरती पर अवतार बनोगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
सौम्य धुनों से क्या जीते रीमिक्सों का गड़बड़झाला
ओरिजनल से पस्त रहेगा, हर नकली-शकली वाला
जब महफ़िल में गुंजित होगी, बच्चन जी की मधुशाला
क्या कर लेंगी शीला-मुन्नी, क्या कर लेगा ऊलाला
✍️ चिराग़ जैन