मर्यादा
न हों हदों में तो छाले रिसाव देते हैं
किनारे धार को बाढब बहाव देते हैं
हदों में हैं तो ख़ैर-ख्वाह हैं उंगलियों के
हदों को लांघ के नाखून घाव देते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
न हों हदों में तो छाले रिसाव देते हैं
किनारे धार को बाढब बहाव देते हैं
हदों में हैं तो ख़ैर-ख्वाह हैं उंगलियों के
हदों को लांघ के नाखून घाव देते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
भीतर-भीतर मन गलता है बाहर नैन बरसते हैं
बीते पल आँखों के आगे हर पल हलचल करते हैं
टूटन, आह, चुभन, सिसकन में जीवन घुलता जाता है
लोग किसी के बिन जी लेना कितना सहज समझते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
मैं अपने दिल के अरमानों को बहला लूँ तो मुश्क़िल है
अगर ख़ुद को किसी सूरत मैं समझा लूँ तो मुश्क़िल है
इधर दिल की तमन्ना है, उधर उनकी हिदायत है
नज़र फेरूँ तो मुश्क़िल है, नज़र डालूँ तो मुश्क़िल है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कुछ ज़र्द से पत्ते थे जो सजकर सँवर गए
कुछ फूल जंगलों में ही खिलकर बिखर गए
कुछ छाछ की छछिया लिए दुनिया पे छा गए
कुछ खीर हाथ में लिए घुट-घुट के मर गए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
अंधेरों की कहानी आफ़ताबों में नही मिलती
हक़ीक़त की निशानी चंद ख़्वाबों में नहीं मिलती
हमारे दर्द को महसूस करने की ज़रूरत है
हमारी ज़िंदगानी इन किताबों में नहीं मिलती
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
मुझे बेबस दिलों में पल रहे अरमान लिखने हैं
ग़रीबों के घरों के दर्द और तूफ़ान लिखने हैं
कभी मौक़ा मिलेगा तो चमन की बात कर लूंगा
अभी फुटपाथ के गलते हुए इन्सान लिखने हैं
✍️ चिराग़ जैन