आज़माइश
यहाँ चलता नहीं दस्तूर कोई भी ज़माने का
ग़ज़ब है लुत्फ़ इन राहों पे सब कुछ हार जाने का
नज़र मिलते ही दिल काबू से बाहर जान पड़ता है
मुहब्बत में कहाँ मिलता है मौक़ा आज़माने का
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
यहाँ चलता नहीं दस्तूर कोई भी ज़माने का
ग़ज़ब है लुत्फ़ इन राहों पे सब कुछ हार जाने का
नज़र मिलते ही दिल काबू से बाहर जान पड़ता है
मुहब्बत में कहाँ मिलता है मौक़ा आज़माने का
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
ज़माने ने सुरों की आह को झनकार माना है
कहीं संवेदना जीती तो उसको हार माना है
बड़े बईमान मानी तय किए हैं भावनाओं के
जहाँ दो दिल तड़पते हों उसी को प्यार माना है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
आज उस चेहरे पे मंज़िल की ख़ुशी भी देखी
और उन आँखों में कल तक की नमी भी देखी
लोग बस जिस्म तक आते थे चले जाते थे
इक मगर तूने मेरे दिल की ज़मीं भी देखी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
दीपोत्सव केवल पर्व नहीं अंधियारे को झुठलाने का
ये दिव्य अलौकिक अवसर है, अंतस के दीप जलाने का
भीतर के गहन अंधेरे में जब आशा दीप जलायेगी
जीवन में उजियारा होगा, दीवाली शुभ हो जाएगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
शायरी इक शरारत भरी शाम है
हर सुख़न इक छलकता हुआ जाम है
जब ये प्याले ग़ज़ल के पिए तो लगा
मयक़दा तो बिना बात बदनाम है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
एक लमहे के लिए सारी जवानी काट दी
ठीकरों की चाह में इक फ़स्ल धानी काट दी
इक न इक दिन कोई तो समझेगा हाले-दिल मिरा
इस ग़लतफ़हमी पे सारी ज़िन्दगानी काट दी
✍️ चिराग़ जैन