Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose, Quotation
यही हाल रहा तो कुछ दिन बाद अरविन्द भैया अपने मफलर को साड़ी के पल्लू की तरह पतलून में खोंस कर हाथ हिला हिला कर बोलेंगे- “हाय या के कीड़े पड़ें…..याको नास जाय… मेरौ जीनौ हराम कार्राखो है। जाय आफत पररई है। जे ना मानैगा …छोरा दामोदर का। हाय लगेगी मेरी हाय… मेरी आत्मान तैं हाय निकलेगी रे….!”
✍️ चिराग़ जैन
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राहुल भैया बिना बात ही नाराज़ हो गए। स्वयंसेवकों ने औरतें आगे कर केवल यह याद दिलाने की क़ोशिश की थी कि ये उम्र मंदिर जाने की नहीं, घर बसाने की है। लेकिन स्वयंसेवकों को भी समझना चाहिये था कि जो आदमी बैंकॉक से भी केवल योग कर के लौटा हो उसका संयोग भगवान भी नहीं करा सकता।
✍️ चिराग़ जैन
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अमित शाह – “अबे ओये, हिंदी में बोल”
मोदी – “इसकी भाषा समझने से अच्छा है कि मैं भारतीय रेल की समस्याएं समझ लूँ।”
बाबा रामदेव – “आप पतंजलि की बुलेट ट्रेन क्यों नहीं चलवाते।”
केजरीवाल – “बुलेट में भी ईवन-ऑड सिस्टम लाएंगे। एक दिन दूसरा, चौथा, छठा, आठवां डिब्बा चलेगा; और दूसरे दिन पहला, तीसरा, पांचवां, सातवां औए नौवां। सन्डे को केवल इंजन चलेगा।”
राहुल गांधी – “मम्मी, शिन चैन के भाषण में मोदी जी गाने क्यों सुन रहे हैं।”
✍️ चिराग़ जैन
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मार्केट में जो सबसे बढ़िया घी है वो बाबा ने बनाया है और पतंजलि का है।
मार्केट में जो सबसे बढ़िया मंजन है वो भी बाबा ने बनाया है और पतंजलि का है।
मार्केट में जो सबसे बढ़िया मैगी है, वो भी बाबा ने ही बनाई है और वो भी पतंजलि की है।
और अब तो हद्द हो गई। बाबा ने एबीपी न्यूज़ में बताया है कि मार्केट में जो सबसे बढ़िया प्रधानमंत्री है वो भी बाबा ने ही बनाया है।
मतलब पतंजलि मैगी की भारी क़ामयाबी के बाद अब पतंजलि मोदी का भी विज्ञापन आएगा।
✍️ चिराग़ जैन
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विज्ञापन से पता चला कि खली की अपनी बॉडी से उनका अपना घर टूट गया। उनको अपने अवार्ड वापस कर देने चाहिए थे। लेकिन उन्होंने अवॉर्ड वापस करने की बजाय अपनी मौसी से सलाह ली। अब वो अम्बुजा सीमेंट से घर बणवा के आराम से रह रहे हैं।
मुझे समझ नहीं आता कि इन सब पुरस्कार विजेताओं की कोई मौसी क्यों नहीं है।
✍️ चिराग़ जैन
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राहुल गांधी ने मम्मी से पूछा है- “मम्मी मम्मी! बीजेपी ‘मार्च फॉर इण्डिया’ कर रही है तो आप ‘अप्रैल फॉर इटली’ क्यों नहीं करती?”
मम्मी माथा ठोकते हुए बोली- “मार्च-अप्रैल का तो पता नहीं पर तू एक दिन ‘श्राद्ध फॉर कांग्रेस’ ज़रूर करेगा।”
✍️ चिराग़ जैन