Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
ये तुमने कौन से अंदाज़ से छुआ साहिब
हुई है बेअसर हर शख़्स की दुआ साहिब
सियार करते थे शब भर हुआ-हुआ साहिब
उन्हें भगाने चला आया तेंदुआ साहिब
हमारे चैन की हुंडी का हो गया सौदा
ज़रा बताओ, मुनाफ़ा किसे हुआ साहिब
ज़ुबां तो काट दी, रोटी न छीनना हमसे
सुना है पेट भी देता है बद्दुआ साहिब
ज़रा-ज़रा सा कब तलक करोगे क़त्ल हमें
दबा ही क्यों नहीं देते हो टेंटुआ साहिब
कई करोड़ निवाले हैं दाँव पर इसमें
तुम्हारे वास्ते जो है महज़ जुआ साहिब
सही बताओ, तुम्हें कुछ समझ नहीं आता?
बहाते रहते हैं क्यों लोग टेसुआ साहिब
तुमसे पहले की मसीहाई चुआती थी छतें
ये तुमने क्या किया, आँखों से कुछ चुआ साहिब
जोंक जब जिस्म से चिपकी तो ये समझ आया
इससे अच्छा था गये साल केंचुआ साहिब
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
सियासत किस तरह करती रही बर्ताव, मत भूलो
कुरेदेंगे तुम्हारे ही बदन के घाव, मत भूलो
तुम्हारी चीख़ से कुर्सी न हिल जाये मसीहा की
अरे ओ हाथरस वालो, अभी उन्नाव मत भूलो
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
कहाँ तक झूठ का पर्दा करोगे
कभी तो झील में चेहरा करोगे
बिछाकर जाल दाना डालता है
तो क्या सय्याद का सजदा करोगे?
कराहों को दबाया जा रहा है
कहीं चीखें उठीं तो क्या करोगे
सुना है भूख शर्मिंदा हुई है
हवस को कब तलक पूरा करोगे
अगर ज़िल्लत की आदत पड़ गई तो
फिर ऐसी ज़िन्दगी का क्या करोगे
उजालों को मिटा कर देख लेना
अंधेरे में तुम्हीं रोया करोगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
आँखन में कजरा धर राधा ने श्याम के रूप को नैन बसायो
श्याम ने बाँसुरी होंठ लगाय के राधा के होंठों पे साज सजायो
राधा ने श्याम को श्याम ने राधा को होरी की भोरी ही रंग लगायो
देह से देह रही बिरहा पर नेह से नेह नहीं बिसरायो
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
कैसा मौसम आन पड़ा है
सबकी शक्लें ज़र्द हुई हैं
ख़ौफ़ज़दा हालात नहीं हैं
ख़बरें दहशतगर्द हुई हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कुर्सी के लिए क़ौम की परवाह उड़ा दो
नारों की आंधियों में हर इक आह उड़ा दो
लफ़्ज़ों की आग से भी न गर मुल्क जले तो
इंसानियत के क़त्ल की अफ़वाह उड़ा दो
✍️ चिराग़ जैन