मुद्दा, मुद्दई, मुजरिम तीनों लुटकर घर जाते हैं, पर
इस मेले में रोज़ मदारी का पैसा बन जाता है
सच को सच साबित करने में लगती है जितनी मेहनत
उससे कम में झूठ यहाँ पर सच जैसा बन जाता है
✍️ चिराग़ जैन
मुद्दा, मुद्दई, मुजरिम तीनों लुटकर घर जाते हैं, पर
इस मेले में रोज़ मदारी का पैसा बन जाता है
सच को सच साबित करने में लगती है जितनी मेहनत
उससे कम में झूठ यहाँ पर सच जैसा बन जाता है
✍️ चिराग़ जैन