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अब सही काम कर रहा हूँ मैं
अपने अंदर उतर रहा हूँ मैं

मैं कहाँ हूँ बता नहीं सकता
शायरी से गुज़र रहा हूँ मैं

चाहतें जो मुझे चिढ़ाती थीं
उनके अब पर कतर रहा हूँ मैं

जी रहा हूँ ये बात भी सच है
ये भी सच है कि मर रहा हूँ मैं

✍️ चिराग़ जैन

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