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औचक निरीक्षण की पूर्वसूचना तो देनी चाहिए ना!

परिवहन व्यवस्था का हाल जानने के लिए एक मंत्री जी अपने ही प्रदेश की रोडवेज बस में सवार हो गए। वो भी भेष बदलकर, बिना लालबत्ती, बिना सुरक्षा-दल और बिना कैमरे की घोषणा किए।
ये कैसे शौक पाल लिए हैं नेताओं ने। व्यवस्था से मंत्रियों का क्या लेना। अरे भई अपने चुनाव, वोट, ठेके, पोस्टिंग-ट्रांसफर पर ध्यान दो और अपनी कुर्सी सम्भालो!
सोचिए, फाइल में जिस व्यवस्था को अधिकारी ने “संतोषजनक”, “उत्कृष्ट” और “जनहितकारी” लिख दिया है, उस पर भरोसा करने में क्या दिक्कत है? यह तो अपने ही विभाग की रिपोर्ट पर अविश्वास है।
अब पंगा लोगे तो झटका तो लगेगा ही। कंडक्टर ने खुले पैसे न होने के कारण मंत्री जी को बस से उतार दिया। यात्रियों की भाषा में इसे बदतमीज़ी कहते हैं, लेकिन विभागीय शब्दावली में शायद इसे “आत्मविश्वासपूर्ण कार्यशैली” कहा जाता होगा।
मंत्री जी ने सोचा, कि बस से उतरकर ऑटो कर लेते हैं। मगर वहाँ भी लोकतंत्र और मंत्री जी चक्कर खा गए। मीटर से चलने के प्रस्ताव को ऑटोवाले ने पूर्णमत से धराशायी कर दिया। मीटर लगा था, पर उसका काम किराया बताना नहीं, वाहन की शोभा बढ़ाना था। किराया तो चालक के मूड, यात्री के कपड़े, मौसम, ट्रैफिक और ग्रह-नक्षत्र देखकर तय हो रहा था। मंत्री जी हैरान रह गए।
लेकिन असली हैरानी जनता को हुई। जनता सोचने लगी कि यह आदमी कौन है, जिसे आज पहली बार पता चला कि कंडक्टर रूखा बोलते हैं और ऑटोवाले मीटर से नहीं चलते?
सबसे चिंता की बात यह है कि नेताओं की यह आदत समाज को गलत संदेश दे रही है। अगर मंत्री खुद बसों में घूमकर सच्चाई खोजेंगे, तो फिर निरीक्षण समितियाँ क्या करेंगी? शिकायत प्रकोष्ठ किसलिए हैं? दर्जनों बैठकें, सैकड़ों समीक्षा रिपोर्टें और हजारों पन्नों की प्रगति-रिपोर्ट आखिर किस दिन काम आएँगी? बसों से लेकर रेलगाड़ी और तमाम विभागों में लगी शिकायत पेटियाँ अनाथ हो जाएंगी। इतने वर्षों से जो कागज़, व्यवस्था को उत्कृष्ट बताते रहे, उन सबका मुँह काला हो जाएगा।
मुझे तो डर है कि कहीं यह बीमारी दूसरे विभागों में भी न फैल जाए। कितना भयानक दृश्य होगा जब सरकारी अस्पतालों में सफाई कर्मचारी मंत्री जी के मुँह पर झाड़ू मार रहे होंगे। गंदगी की शिकायत करने पर वार्ड बॉय धक्का मार रहे होंगे। क्या इमेज बनेगी अपने विकसित देश की।
सोचिए, अपने लाव-लश्कर से बिछड़कर किसी पुलिसवाले के हाथ लगे मंत्री जी का जब अपशब्दों से अभिषेक किया जाएगा तो लोकतंत्र को कितना बुरा लगेगा।
प्रशासन की पूरी परंपरा ही खतरे में पड़ जाएगी। वर्षों से जो समस्याएँ केवल ज्ञापन, ट्वीट और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुरक्षित थीं, वे अचानक प्रत्यक्ष दिखाई देने लगेंगी।
मंत्रियों को चाहिए कि वे अपने औचक निरीक्षण की पूर्व सूचना जारी करें ताकि कंडक्टर नहा-धोकर इस्तरी की हुई यूनीफॉर्म पहनकर आए, बस धुली हुई हो, बस में पहले से कैमरा टीम तैनात हो, और कंडक्टर के विनम्र व्यवहार की रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करायी जाए। इससे दुनिया भर में हमारे देश की वाहवाही होगी।
मंत्री जी यदि सचमुच जनता की तकलीफ़ें जानने लगेंगे, तो जनता की वर्षों पुरानी शिकायतों का रहस्य समाप्त हो जाएगा। फिर चुनावी भाषणों में “हमें अभी पता चला है” जैसे ऐतिहासिक वाक्य कौन बोलेगा?
लोकतंत्र की सेहत के लिए कुछ रहस्य बने रहना भी आवश्यक है। जनता को यह भरोसा रहना चाहिए कि सरकार को सब कुछ मालूम है, और सरकार को यह सुकून रहना चाहिए कि जनता मानती है—उसे कुछ भी मालूम नहीं। यही संतुलन लोकतंत्र को अब तक चलाता आया है। मंत्री जी यदि बार-बार बसों में बैठकर इस संतुलन को बिगाड़ेंगे, तो व्यवस्था के ब्रेक फेल हो जाएंगे।

✍️ चिराग़ जैन

जोधपुर का भव्य विवाहोत्सव

जोधपुर जंक्शन से ट्रेन दिल्ली की ओर रवाना हो रही है। दो दिन तक लगातार उत्सव से ऊर्जा बटोरकर अब ज़िंदगी की गाड़ी फिर अपने फिक्स रूटीन पर दौड़ने को तैयार है।
कवि-सम्मेलन को एक परिवार की तरह जीनेवाली पीढ़ी के एक शानदार पुरोधा, मेरे अग्रज श्री शैलेश लोढ़ा जी की बिटिया स्वरा के विवाह समारोह का संयोग बना।
अपनत्व और अधिकार के साथ बेटी के पिता ने अपने कवि-परिवार के अग्रजों, अनुजों और मित्रों को निमंत्रण भेजा। जोधपुर शहर में आयोजन हुआ। अपने व्यवहार और दोस्ती के लिये जाने जानेवाले शैलेश जी के अतिथियों की सूची में कवियों के अतिरिक्त राजनीति, मीडिया, अभिनय, उद्योग, खेल और अध्यात्म जगत् के तमाम सितारे सम्मिलित थे।
हर शख्स अपने यश का पदवेश द्वार पर छोड़कर नितांत सहज रूप में बेटी-दामाद को आशीष देने के लिए उपस्थित दिखा।
अन्य क्षेत्रों के सितारों ने कवियों के साथ और कवियों ने अन्य सितारों के साथ जमकर फोटोबाज़ी की दो-तीन दिन की डेस्टिनेशन वेडिंग में सबके प्रवास का बेहतरीन प्रबंध था। जोधपुर के आलीशान होटलों में सभी के ठहरने की बेहतरीन व्यवस्था थी। अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग वेन्यू थे, सो सब अतिथियों के लिए पर्याप्त गाड़ियों की व्यवस्था रही।
इतने सारे अतिथि, इतने सारे VIP’s, इतने सारे सेलिब्रिटी, इतने सारे फंक्शन… और किसी भी शख़्स को रत्तीभर भी असुविधा नहीं हुई।
जोधपुरी शान के रंग में रंगा यह विवाहोत्सव मॉनसून की दस्तक और मौसम की भयानक उमस से भी प्रभावित नहीं हुआ।
छोटी-छोटी बातों का प्रबंधन की दृष्टि से पूरा ध्यान रखा गया। हर फंक्शन अपनी किस्म में अनूठा था किन्तु कवि होने के नाते दो बातें मेरे मन को छू गईं। प्रथम विवाह वाले दिन पूर्वान्ह बेला में ‘अक्षर स्वर’ शीर्षक से एक फंक्शन हुआ, जिसमें सुमित्रानंदन पंत से लेकर, बालकवि वैरागी, प्रो अशोक चक्रधर और श्री सुरेन्द्र शर्मा सरीखे कवियों के शब्दों से स्वरा-और-शाश्वत को आशीष मिल रहा था।
द्वितीय, जयमाला के उपरांत स्वरा के सवर्गीय दादाजी का जो वीडियो चला, उसने मन को भावुक कर दिया।
जोधपुर के उमेद भवन पैलेस में सोमवार की शाम को मुख्य विवाह समारोह था। जैसे ही घराती अपने अपने सिर पर साफा बंधवाकर उमेद भवन के भव्य लॉन में पहुँचे तो ऐसा लगा जैसे किसी कल्पनालोक को धरती पर उतार लिया गया हो। प्रकाश और फूल सभी आयोजनों में होते ही हैं किंतु उनका जो संयोजन था, उसके सलीके ने इस आयोजन को विशिष्ट बना दिया था। रजनीगंधा, श्वेत गुलाब और मोतिया की हृदयस्पर्शी महक… हरे लॉन पर सफेद रंग की पवित्रता का contrast और उस सफ़ेदी में एकाकार होती हुई रौशनी…
अलकापुरी का जैसा वर्णन शास्त्रों में मिलता है, उससे लगभग मिलता-जुलता मंडप, इत्मीनान से एक-एक रीति की व्याख्या करते हुए साथ फेरे, पार्श्व में महामंत्र नवकार, और वैदिक मंत्रोच्चार की अनुगूंज…
उमेद भवन के आकाश में आतिशबाज़ी की झिलमिल थी और धरती पर सितारे जगमगा रहे थे। ऐसा लगता था, मानो सितारों से भरा एक टुकड़ा आसमान अपने दो नक्षत्रों के एक हो जाने का आनंद मना रहा हो। मानो एक अदद आकाशगंगा हँसी और किलोल के मूड में हो।
सबके नाम गिनाना तो मेरे लिए सम्भव नहीं है फिर भी स्मृति की सीमाओं में जिनके नाम यकायक कौंधते हैं उनमें सर्वश्री लक्ष्यराज सिंह, विकी कौशल, राकेश बेदी, गजराज राव, रज़ा मुराद, राजीव ठाकुर, परितोष त्रिपाठी, सुदेश भोंसले, मनोज मुन्तशिर, सुधीर चौधरी, सौरभ द्विवेदी, अमीश देवगन, चित्रा त्रिपाठी, इरफ़ान पठान, मनहर उधास, भजनलाल शर्मा, प्रो अशोक चक्रधर, सुरेन्द्र शर्मा, अरुण जैमिनी, डॉ विष्णु सक्सेना, डॉ सर्वेश अस्थाना, पार्थ नवीन, अशोक चारण, संदीप शर्मा, संजय झाला, डॉ प्रवीण शुक्ल, डॉ भुवन मोहिनी, मुमताज़ नसीम, मनीषा शुक्ला, अंजुम रहबर, गजेंद्र प्रियांशु, मनिका दुबे, स्वयं श्रीवास्तव, गोविंद राठी, मुकेश गौतम, संजय खत्री, ऋतु गोयल, चेतन चर्चित, शशिकांत यादव, साक्षी तिवारी, अजातशत्रु समेत तमाम परिचित चेहरे लगातार मौजूद रहे और फिर मुख्य समारोह में बाबा रामदेव, डॉ कुमार विश्वास, मदन राठौड़ा, जगदीश शर्मा, अनामिका अम्बर, सौरभ सुमन और रमेश मुस्कान की उपस्थिति से चार चांद लग गए।
शैलेश भैया में जो स्वाभाविक मित्रता है, उसका आलीशान प्रतिबिंब इस अविस्मरणीय विवाह समारोह में दिखा। स्वरा और शाश्वत के चेहरे पर अनवरत खिली हुई प्रसन्नता ने लोढ़ा परिवार को थकने नहीं दिया।
कहते हैं आनंद भविष्य का पाथेय है। ईश्वर से यही आकांक्षा है कि पिछले 3 दिन में जितनी आनंद वृष्टि हुई है, उससे स्वरा और शाश्वत का दाम्पत्य पल्लवित हो तथा इन दोनों का जीवन अनवरत उत्सवमयी बना रहे।

✍️ चिराग़ जैन

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