Blank Verse, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Poetry
ओ कोरोना
हम पर पहले ही है काफ़ी रोना-धोना
तुम जीवन दुश्वार करो ना!
तुमको क्या लगता है, क्यों बे
हम खाँसी से डर जाएंगे
ऐसी खाँसी करने वाले तो भारत में
सीएम बने फिरा करते हैं
हाथ मिलाने से बढ़ते हो
ताप बढ़े तो मर जाते हो
भारत में टेम्प्रेचर
अड़तालीस डिग्री तक चढ़ जाता है
राख तलक भी नहीं मिलेगी
राजनीति के हाथ अगर तुम चढ़ जाओगे
नामो-निशां नहीं बचने का
ये वज्रोदर
पुल, चारा, शौचालय सब कुछ खा जाते हैं
इनकी महाक्षुधा के आगे
तुम बिन सैनेटाइज़र के ही मिट जाओगे
इन्हें नहीं आता कुछ भी जीवन भर ढोना
ओ कोरोना!
अगर किसी दिन
किसी मीडिया के चैनल में धरे गए तो
प्रश्नों का तूफ़ान उठेगा
उत्तर देने तक का अवसर नहीं मिलेगा
इनके लिए तुम्हारी कोई
चार बुलेटिन से ज़्यादा औक़ात नहीं है
अगली बड़ी ख़बर आने तक
तुम हो इनका खेल-खिलौना
ओ कोरोना!
उत्सव सारे मंद हो गए
खेल-तमाशे बंद हो गए
आना-जाना बंद हुआ है
हँसना-गाना बंद हुआ है
ओ सन्नाटै के उद्घोषक
शर्म नहीं आती क्या तुमको
काफ़ी आफ़त मचा चुके हो
अब तुम जाकर किसी कुँए में डूब मरो ना!
ओ कोरोना!
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए और मीडिया की मौज हो गई। भाजपाई बता रहे हैं कि पार्टी को अपने ख़ून-पसीने से सींचनेवाले किसी नेता को साइड लाइन करना नैतिकता नहीं है। यह बयान सुनते ही शत्रुघ्न सिन्हा, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा और के एन गोविंदाचार्य जैसे ढेर सारे नाम स्मृतियों में तैर गए। कांग्रेसी बता रहे हैं कि जो दल बदल रहा है वह तुम्हारा भी सगा नहीं होगा। यह बयान सुनते ही नवजोत सिंह सिद्धू, बी डी शर्मा, घनश्याम तिवारी और जनार्दन सिंह गहलोत जैसे नाम ठठाकर हँसने लगे।
भाजपाइयों को कांग्रेस का इतिहास याद आ गया और वे सीताराम केसरी, नरसिम्हा राव और डॉ प्रणब मुखर्जी के अपमान की गाथाएँ सुनाने लगे। ये गाथाएँ सुनकर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी की आँखें डबडबा आईं।
कांग्रेस में दो लीडरों के आगे सबकी प्रतिभा को दबाने की परंपरा रही। भाजपा में भी प्रतिभाशाली नेतृत्व को सलीक़े से साइड लाइन करने के अनगिन उदाहरण मिल जाएंगे।
प्रश्न कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, पीडीपी, जदयू, राजद, द्रमुक, अद्रमुक, झामुमो या अन्य किसी दल का है ही नहीं। यह शुद्ध रूप से सत्ता की लड़ाई है, जिसमें विचारधारा, नैतिकता, राष्ट्रहित, जनहित, धर्म, सम्प्रदाय, विदेशनीति, अर्थनीति जैसे तमाम शब्द खिलवाड़ की तरह प्रयोग किये जाते हैं।
राजनीति का एक ही सिद्धांत है, हमारे साथ रहो, नहीं तो हमसे गाली खाओ। यह सिद्धांत सभी का है। बेशर्मी और ढिठाई से प्रवक्ता बनकर चैनल्स पर बैठनेवाले रीढ़विहीन लोगों के घर में दर्पण की उपस्थिति निषेध होती है। राजनीति की चौखट पर क़दम रखते ही लाज के चीर स्वतः उतार फेंकने होते हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के दल बदल लेने से कुछ नहीं बदलेगा। चैनल जब कभी सिंधिया परिवार के इतिहास पर बहस करेंगे तो भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ता आपस में संवाद बदल लेंगे। ड्रामा वैसा ही चलेगा। अब कांग्रेस झाँसी की रानी के साथ हुए विश्वासघात पर सिंधिया परिवार को ग़द्दार बनाने पर तुल जाएगी और भाजपा सुभद्राकुमारी चौहान को कम्यूनिस्ट घोषित करके उस कविता और उस दौर के इतिहास को साज़िश करार दे देगी।
तमाशा चलता रहेगा। लीडर अवसर देखकर दल बदलते रहेंगे। आलाकमान समय की नज़ाक़त को देखते हुए सुखरामों को गले लगाते रहेंगे। कार्यकर्ता तो बेचारा जमूरा है। आज उसे कहा जाएगा कि हमने सिंधिया से कुट्टा कर ली है। और कार्यकर्ता फेसबुक पर उसके नाम की गारी गाने लगेगा। कल उसे कहा जाएगा कि अब हमने उससे अब्बा कर ली है और कार्यकर्ता उसके नाम की बधाई गाने लगेगा।
विधायकों को रिजॉर्ट में क़ैद करके ईद के बकरों की तरह ख़रीदने की परंपरा पुष्ट हो रही है और कार्यकर्ता चुनाव के दिन लाइन में लगकर वोट देने की अपील करते रहेंगे। आदर्श नागरिक लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए व्हील चेयर तक पर लदकर वोट डालने जाएगा और समझदार लीडर उसके वोट को हथियार बनाकर लोकतंत्र की टांगें काट डालेगा।
न्यायालय अपील होने तक प्रतीक्षा करेगा और राजनीति क़ानूनी ख़ामियों का लाभ उठाकर न्याय को फाँसी पर लटकाते रहेंगे। कार्यपालिका नपुंसक ख़सम की तरह ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ के सिद्धांत पर जिस रात की जो दुल्हन होगी, उसी के तलवे चाटती रहेगी। और मीडिया इस पूरे दंगल में अपनी हाट बिछाकर टीआरपी बटोरती रहेगी।
जनता चुपचाप देखेगी। क्योंकि जनता ने कसम खाई है –
हम, भारत के लोग…!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Diary, Prose, Shabdon Ki Kunjgaliyaan
6 मार्च। आज एवरेस्ट को क़रीब से देखा। बादलों के बीच घिरा श्वेत हिमालय, उस पर सोने सी पिघलती सूरज की रौशनी, नीले चोगे में लिपटे आकाश पर सफेद बादलों की बूंदी का प्रिंट। साथ में अपने भौगौलिक ज्ञान से परिपूर्ण महेंद्र अजनबी जी, जीवन के प्रति बेहद दार्शनिक सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त आशकरण अटल जी और प्रकृति के प्रत्येक बिम्ब में गीत की मूल पीड़ा तलाश लेने वाली डॉ सीता सागर। छोटे से देश नेपाल में जीवन की सबसे अनुभवसिक्त यात्रा भोग रहा हूँ। कवि-सम्मेलनों का धन्यवाद!
9 मार्च। नेपाल के तीन शहरों में हिंदी कविता का महोत्सव हुआ। एकल विद्यालय के संपर्क अभियान के उपलक्ष्य में आयोजित इन कवि-सम्मेलनों के आयोजन में जिन लोगों को कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था करते देखा उनमें एस्सल समूह के उपाध्यक्ष श्री लक्ष्मीनारायण गोयल, जिंदल इंडस्ट्रीज़ के चेयरमेन श्री सुरेन्द्र कुमार जिंदल, श्री बिट्ठल माहेश्वरी, श्री महावीर घिराइया, श्री अशोक बैद, श्री गणेश खेतान, श्री अशोक सर्राफ, श्री विनोद पोद्दार, श्री शिव गोयल और श्री ओमप्रकाश लोहिया जैसे लक्ष्मीपुत्र सम्मिलित थे। जो लोग गलीचों से नीचे क़दम नहीं रखते उन्हें बीरगंज के जीतपुर गाँव की कीचड़ भरी गलियों में नंगे पाँव चलते देखा। जिनसे मिलने के लिए लोगों को अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है उन्हें गाँव की कच्ची मढ़ैया में बैठकर लोगों से बिनती करते देखा कि वे अपने बच्चों को पढ़ने दें। जिनके पास करोड़ों के बिज़निस प्रोपोज़ल लिए लोगों की लाइन लगी रहती है उनको भरे सभागार में हैंड्स माइक लेकर लोगों से डोनेशन मांगते देखा।
‘जो विद्यालय नहीं जा सकते, उनके पास विद्यालय को ले जाना होगा’ -इस पुनीत उद्देश्य से कार्यरत एकल विद्यालय के इन कार्यक्रमों में पहली बार देखा कि भामाशाह स्वयं महाराणा प्रताप की तलाश में दर-दर भटक रहा है।
क्रमशः काठमांडू, बिराटनगर और बीरगंज में हज़ारों लोग इन कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए। कविता के रस भी छलके, ठहाकों का महोत्सव भी हुआ और एकल विद्यालय के पुनीत कार्य के लिए हजारों लोगों को एकसूत्र में बंधते भी देखा।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose, Quotation
पीएम ने कहा है कि वे सोशल मीडिया से दुःखी हो गए हैं।
और यह बात भी उन्होंने सोशल मीडिया से ही बताई.
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कुर्सी के लिए क़ौम की परवाह उड़ा दो
नारों की आंधियों में हर इक आह उड़ा दो
लफ़्ज़ों की आग से भी न गर मुल्क जले तो
इंसानियत के क़त्ल की अफ़वाह उड़ा दो
✍️ चिराग़ जैन