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कोई खिलने पे आ जाए तो

महीना जून का है तिश्नगी हद से गुज़रती है
ज़मीं दो बून्द पानी के लिए भी आह भरती है
ख़ुदाया तल्ख़ हैं तेवर हवाओं के मग़र फिर भी
कोई खिलने पे आ जाए तो हर डाली सँवरती है

✍️ चिराग़ जैन

अमित शाह गश्त पर हैं

न्यायालय ने पूछा-
“पंद्रह दिन प्रतीक्षा कर लेंगे
तो क्या बिगड़ जाएगा?”

कांग्रेसी बोले-
“अठहत्तर विधायकों को
पन्द्रह दिन रेसोर्ट में रखने का
ख़र्चा बढ़ जाएगा।”

न्यायालय बोला – “विधायक घर पर रहें
तो इसमें क्या डर है?”

कांग्रेसी बोले- “कमाल करते हैं साहब
आपको पता नहीं
अमित शाह गश्त पर हैं!”

✍️ चिराग़ जैन

राज करेगी भाजप्पा

दक्षिण में कर्नाटक के रीयल नाटक का शोर रहा
उत्तर में सेना को देखा तो मंज़र कुछ और रहा
काशी में इक पुल टूटा जो पूरा आदमखोर रहा
नेताजी का केवल सत्ता हथियाने पर ज़ोर रहा
जब विधायकों की मंडी लगा ली, नियम की सुध ना ली
लीडर हुए मलंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो

महबूबा की मांग नहीं ये कैकयी के वरदान हैं जी
जिन पर बंदिश ठोकी है वे अपने वीर जवान हैं जी
आतंकवादी को मत पकड़ो क्योंकि अब रमज़ान है जी
लकड़बग्घे ईद मनाएँ और बकरे कुर्बान हैं जी
अरे किस किस से दोस्ती बना ली, ये सत्ता की दलाली
बड़ी है बदरंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो

ईद मनाने देना उनको सैनिक सारे चुप रहना
वो तुमको पत्थर मारे या थप्पड़ मारे चुप रहना
महबूबा मुफ्ती मैडम ने किए इशारे चुप रहना
56 इंची वाले फूट गए गुब्बारे चुप रहना
तुमने वीरों के बेड़ियां क्यों डाली, शोषण ही किया ख़ाली
कैसे जीतेंगे जंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो

क्या सोचा था कानूनों की लाज करेगी भाजप्पा
नैतिकता की पारी का आग़ाज़ करेगी भाजप्पा
गोवा, मणिपुर भूल गए जो आज करेगी भाजप्पा
कितनी भी सीटें ले आओ राज करेगी भाजप्पा
राज्यपाल पे भी उंगली उठा ली, अदालत खुलवा ली
चला न कोई रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो

अमित शाह घर से निकले तो ख़ौफ़ खा गए कांग्रेसी
अपने जीते हुए विधायक लुका छुपा गए कांग्रेसी
जेडीएस का सीएम बन जाए, इस पर आ गए कांग्रेसी
येदुरप्पा कुर्सी ले भागे गच्चा खा गए कांग्रेसी
हाय आगे से थाली उठा ली, छू भी न सके प्याली
सपना सा हुआ भंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ये ठीक नहीं ढंग भाइयो

✍️ चिराग़ जैन

ईद के अवसर पर कश्मीर में सेना पर प्रतिबंध

सुना है एक मदमस्त हाथी ने
बिल्ली के कहने पर
शेरों के हाथ बांध दिए
ताकि भेड़िये मेमनों की दावत उड़ा कर
ईद मना सकें।

शेरों को आदेश है
कि लकड़बग्घे उन्हें अपमानित करें तो हो लें
क्योंकि बेचारे लकड़बग्घों का रमज़ान है
उनसे अपमानित हो लोगे तो बेचारे ख़ुश हो जाएंगे।

✍️ चिराग़ जैन

बैरागी जी को शब्दाजंलि

शब्दों को ईंधन करने का
जीवट ठण्डा होता है क्या
ज्वाला में दहकर भी कंचन
अपनी आभा खोता है क्या
यम के आदेशों से डरकर
कब कीर्तियान रुक पाते हैं
कुछ श्वासों के थम जाने से
क्या झंझावत चुक जाते हैं
मिट्टी को भस्म बना देना
-बस यही चिता कर पाती है
अक्षुण्ण वज्र रह जाता है
और स्वयं चिता मर जाती है
काया ने आँखें मूंदी हैं
चिंतन के नेत्र प्रखर ही हैं
जिव्हा ने चुप्पी ओढ़ी है
भावों के शब्द मुखर ही हैं
दीपक की पीर समझने को
बलिदान कई रातें करके
जो थका नहीं इक क्षण को भी
नक्षत्रों से बातें करके
जिसने जर्जर पीड़ाओं को
समिधा का मान दिलाया हो
जिसने जग की तृष्णाओं को
अंजलि से अमिय पिलाया हो
जिसने कविता में जीवन भर
अनहद का अंतर्नाद रचा
जिसने ज्वाला की लपटों का
कविताओं में अनुवाद रचा
जिसने आँसू की आह सुनी
जिसने करुणा का रोर सुना
जिसने युग की पीड़ा गाई
जिसने आशा का शोर सुना
यमदूत उसे ले जाने का
उपक्रम कैसे कर सकता है
जिसने शब्दों में प्राण भरे
वह स्वयं कहाँ मर सकता है
करुणा में जब पग जाते हैं
फिर अक्षर ध्वस्त नहीं होते
सूरज-वूरज होते होंगे
बैरागी अस्त नहीं होते

✍️ चिराग़ जैन

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