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शोर

चीखने से शोर बढ़ता है सम्बन्ध नहीं। सुकून की खटिया बुनी जाती है सहजता की बाण से; इसमें प्रयास की गाँठें हों तो मुक्त नहीं हो सकती नींद चुभन से! जताना और बताना व्यापार में होना चाहिए व्यवहार में नहीं। और प्यार में… …वहाँ तो आँखें मिलते ही फिफ्थ गीयर लग जाता...

अब उसकी कुछ आस नहीं है

सूखी हुई नदी के तट पर नौका लेकर आने वाले जिस कलकल को ढूंढ रहा है अब उसकी कुछ आस नहीं है चलते-चलते बहा पसीना, ठहर-ठहर कर नदिया सूखी तू होता जाता था लथपथ, वो होती जाती थी रूखी लहर-लहर लहरा-लहरा कर तुझको पास बुलाने वाले जिस आँचल को ढूंढ रहा है अब उसकी कुछ आस नहीं है माना...

मेहंदी

सावन की हरियाली उतर आई है हथेलियों पर …महकने लगा है भाग्य! ✍️ चिराग़ जैन

प्रतीक्षा

कब उगेगा दिन, तुम्हारे आगमन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कब कोई आकार होगा इस सपन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं युगों से रोज़ लिख-लिखकर संदेशे बादलों के हाथ भेजे जा रहा हूँ शुद्धतम जल से चरण धोऊँ तुम्हारे आँसुओं को भी सहेजे जा रहा हूँ कब मुझे...

प्रेम : पावनता का द्वार

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर। पहुँची कोई और थी, लौटी कोई और।। योगेश छिब्बर जी का यह दोहा भारत में प्रेम के उत्कर्ष को समझने के लिये पर्याप्त हैं। भारत में प्रेम का चरम यह है कि मीरा ने जो प्रेमगीत रचे, वे भक्ति की मानक कविताएँ बनकर जग में प्रसिद्ध हुए। यह भारतीय...
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