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प्यार समझना मुश्किल क्यों है

इस दुनिया में प्यार रहे तो भावों का सत्कार रहे तो कितना प्यारा होगा ये संसार समझना मुश्किल क्यों है प्यार समूचे जीवन का है सार; समझना मुश्किल क्यों है किस्सा सुनकर मन सबका कहता है इसमें भूल हुई है बिन मतलब की दुनियादारी पाँखुरियों में शूल हुई है जो रांझे के साथ हुई थी...

हम तुम पार उतर जाएंगे

सुख होगा, उल्लास रहेगा कभी-कभी कुछ त्रास रहेगा जब सम्बन्ध निभेगा तो फिर उसमें हर एहसास रहेगा अच्छे-बुरे समय से हम-तुम, मिलकर साथ गुज़र जाएंगे अपनेपन की नौका लेकर, इक दिन पार उतर जाएंगे हम दोनों ने इस क़िस्से को मिलकर साथ सँवारा भी है इक किरदार तुम्हारा भी है, इक किरदार...

आहट

वो तुमसे मेरी पहली मुलाक़ात थी और सिर्फ़ तुम जानती थीं कि आख़िरी भी…! स्टेशन पर खड़े चिड़चिड़ा रहे थे सभी लोग कि ट्रेन लेट क्यों हो रही है और हर आहट के साथ सहम जाता था मैं -’हाय राम! कहीं गाड़ी तो नहीं आ रही!’ ✍️ चिराग़...

मुहब्बत सबको होती है

बहुत ज़्यादा न हो पर कुछ तो हसरत सबको होती है जहाँ में नाम और शोहरत की चाहत सबको होती है मरासिम हर दफ़ा ताज़िन्दगी निभता नहीं लेकिन किसी से इक दफ़ा सच्ची मुहब्बत सबको होती है मन अपने आप से भी इक ना इक दिन ऊब जाता है किसी अपने की दुनिया में ज़रूरत सबको होती है हर इक मुज़रिम...

सपनों का कॅनवास

मैं खुली आँखों से एक सपना देखता था अक्सर। बनाता था इक तस्वीर अपनी ख़्वाहिशों की। न जाने कब उभर आया एक मुकम्मल इंसान मेरे मन के कॅनवास पर। न जाने क्यों मैंने रख दिया अपना दिल बिना सोचे-समझे इस इंसान के सीने में …तुम केवल एक रिश्ता नहीं हो मेरे लिए तुम मेरे सपनों...
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