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सूरज

फिर अंधेरा निगल गया सूरज फिर चिराग़ों को खल गया सूरज चंद पहरों की ज़िन्दगानी में कितने चेह्रे बदल गया सूरज गर हुआ ऑंख से ज़रा ओझल लोग कहते हैं ढल गया सूरज रात गहराई तो समझ आया सारी दुनिया को छल गया सूरज आज फिर रोज़ की तरह डूबा कैसे कह दूँ सँभल गया सूरज ✍️ चिराग़...

मिरी आँखों का मंज़र देख लेना

मिरी आँखों का मंज़र देख लेना फिर इक पल को समन्दर देख लेना सफ़र की मुश्क़िलें रोकेंगी लेकिन पलटकर इक दफ़ा घर देख लेना किसी को बेवफ़ा कहने से पहले ज़रा मेरा मुक़द्दर देख लेना बहुत तेज़ी से बदलेगा ज़माना कभी दो पल ठहरकर देख लेना हमेशा को ज़ुदा होने के पल में घड़ी भर ऑंख भरकर देख...

लोग आते-जाते हैं

दिल भी है इक ख़ूबसूरत से इदारे की तरह लोग आते-जाते हैं, पानी के धारे की तरह जब से ये संसार सारा हो गया है आसमां तब से है इन्सानियत टूटे सितारे की तरह चल सको तो तुम किसी के बन के उसके संग चलो वरना इक दिन छूट जाओगे सहारे की तरह दिल के रिश्तों को फ़रेबी उंगलियों से मत छुओ...

इक पहेली हूँ

धूप में निखरोगे मेरी छाँव में जल जाओगे इक पहेली हूँ, कहाँ तुम ढूंढने हल जाओगे बर्फ़-सी ठंडक तो उसकी बात में होगी मगर छू लिया जिस पल उसे उस पल ही तुम जल जाओगे विषधरों के दंश का संकट भी झेलोगे ज़रूर जब कभी लेने किसी जंगल से संदल जाओगे धूप बनकर तुम दलानों में पसरते हो मगर...

छोड़ो वेद-पुरान

ईश्वर, बालक, माँ, कवि, ये सब एक समान इन्हें प्रेम से जीत लो, छोड़ो वेद-पुरान ✍️ चिराग़ जैन
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