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आकांक्षा

तलवे याद न रख सकें, मिट्टी का अहसास इतना ऊँचा मत रखो सपनों का आकाश ✍️ चिराग़ जैन

मानव की तस्वीर

पंक्ति अक्षर-शरों भरी तूणीर दिखाई देती है दर्द भरे दिल में दुनिया की पीर दिखाई देती है हास्य कहो या व्यंग्य कहो, शृंगार कहो या शौर्य कहो हर कविता में मानव की तस्वीर दिखाई देती है ✍️ चिराग़...

तमन्ना

है तमन्ना यही प्यार जीता रहे सबका जीवन गुनाहों से रीता रहे भावना सब के दिल में यही जन्म ले दुख मैं पीता रहूँ सुख तू पीता रहे ✍️ चिराग़...

जो है वही कहना

किसी भी चोट को सहना बड़ा दुश्वार होता है जु़बां हो और चुप रहना बड़ा दुश्वार होता है ये माना दर्द को अभिव्यक्त करना भी ज़रूरी है मगर जो है वही कहना बड़ा दुश्वार होता है ✍️ चिराग़...

कल की छोड़ो, कल का क्या है

ऐसा मत सोचो कि जब सब सोचेंगे तब सोचेंगे पहले हम सोचेंगे तब ही तो इक दिन सब सोचेंगे आख़िर बंदूकों से ही जब सारे काम निकलने हैं आयत रटने से क्या हासिल अहले-मक़तब सोचेंगे दो और दो को पाँच बनाने की तरक़ीबें क्या होंगीं इस उलझन का हल कुर्सी पर बैठे साहब सोचेंगे आज जिन्हें...
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