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दिल में आह बाक़ी है

जब तलक़ दिल में आह बाक़ी है तब तलक़ वाह-वाह बाक़ी है अब कहाँ कोई ज़ुल्म ढाता है ये पुरानी कराह बाक़ी है ख्वाब सारे फ़ना हुए लेकिन देखिए ख्वाबगाह बाक़ी है मैंने सब कुछ लुटा दिया लेकिन अब भी इक ख़ैरख्वाह बाक़ी है जिस्म को रूह छोड़ती ही नहीं हो न हो कोई चाह बाक़ी है ज़िन्दगानी भटक गई...

हादसा थी ज़िन्दगी

हादसा थी ज़िन्दगी, होता रहा जो उम्र भर दौलते-लमहात थी, खोता रहा जो उम्र भर कौन समझे उसके अश्क़ों की ढलकती दास्तां बस दरख़तों से लिपट, रोता रहा जो उम्र भर अब तो कलियों से भी उसकी पीठ क़तराने लगी पत्थरों को गुल समझ ढोता रहा जो उम्र भर इक न इक दिन उसका घर अश्क़ों में डूबेगा...

अंदाज़ा न कर

पीर की ज़द का अंदाज़ा न कर कल की आफ़त का अंदाज़ा न कर ज़ख़्म गहरा है दर्द होगा ही अब रियायत का अंदाज़ा न कर वक़्त पर ख़ुद-ब-ख़ुद पनपती है यूँ ही हिम्मत का अंदाज़ा न कर बीज में पेड़ छिपा होता है क़द से ताक़त का अंदाज़ा न कर सिर्फ़ दो दिन की मुलाक़ातों से उनकी आदत का अंदाज़ा न कर हँस...

नज़रिया

मुझे इन्सान चारों ओर नज़र आता है अक्स अपना ही तो हर ओर नज़र आता है ये दुनिया शायद आइनों की इक इमारत है तुझे हर शख्स यहाँ चोर नज़र आता है ✍️ चिराग़...

स्वीकार

बरसों से बरसते हैं अब क्या असर करेंगे बेबस ये बसेरे हैं कैसे बसर करेंगे रुकती है नज़र जाकर चूते हुए छप्पर पे छप्पर को भी गिरा दो खुलकर सबर करेंगे ✍️ चिराग़...
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