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ज़माना हुआ तंग

पिछला भी सप्ताह महज कानों कानों में बीत गया
कर्नाटक के नाटक में और हंगामों में बीत गया
सोनम की शादी के कुछ फिल्मी गानों में बीत गया
जिन्ना से जो वक़्त बचा था, तूफानों में बीत गया
कभी रैली में खिल्ली उड़ा ली, या खेला गाली गाली
ज़माना हुआ दंग भाइयो

डाँट डपट कर लोकतंत्र में लोग नहीं पाले जाते
गुंडागर्दी से सिस्टम के दोष नहीं टाले जाते
यदुरप्पा जी यूँ सत्ता के दीप नहीं बाले जाते
हाथ-पाँव बंध जाते हैं तो वोट नहीं डाले जाते
ढूंढो अपने दिमाग़ की भी ताली, चलाओ न दुनाली
उल्टी पड़ेगी जंग भाइयो

एक रोज़ कोई अधिकारी टीवी पर बड़बड़ा दिया
राई को बिन बात अचानक पर्वत जितना बढ़ा दिया
चैनल वैनल एफबी शेफबी क्या से क्या गुड़मुड़ा दिया
सच बतलाओ इस अंधड़ में कौन सा मुद्दा उड़ा दिया
हाय आंधियो की सूचना भुना ली, हवाएं बेच डालीं
ये कैसे हैं लफंग भाइयो

कसमें खाने से योद्धा का धीर टूटने लगता है
लक्ष्य भटक जाता है और उद्देश्य छूटने लगता है
कांग्रेस की फेयरवेल के मनसूबे मत पालो जी
पेड़ जहाँ से काटोगे वो वहीं फूटने लगता है
ऐसी चोटी में गाँठ क्यों लगा ली, कसम कोई खा ली
राहुल को किया तंग भाइयो

तुम निश्चय कर लेते तो फिर आड़ लगाना मुश्किल था
दुश्मन की जय कहने वालों का बच पाना मुश्किल था
देश, राज्य, मंत्रालय, कुलपति सब पर राज तुम्हारा है
फिर भी क्योंकर जिन्ना की तस्वीर हटाना मुश्किल था
बिना बात क्यों ये बात भी बढ़ा ली, ये है जनाबे आली
तुष्टिकरण का रंग भाइयो

वे बोले कि कर्नाटक में बहुमत इनका टच होगा
राहुल गांधी का भाषण अब सीरियसली टू मच होगा
मौसम का अनुमान तलक झूठा साबित हो जाता है
ऐसे में संजय राउत का दावा कैसे सच होगा
देखो ये तो पुलाव हैं खयाली, बिना हथेली ताली
ये बातों की है जंग भाइयो

सारे यार तुम्हारे उनके घर जा बैठे राहुल जी
कई राज्य अपनी ज़िद में तुम निपटा बैठे राहुल जी
कांग्रेस की सारी इज़्ज़त लुटवा बैठे राहुल जी
सिद्धरमैया भी मोदी के गुण गा बैठे राहुल जी
अपने हाथों से लुटिया डुबा ली, बजाते रहो ताली
चाकू पे लगा ज़ंग भाइयो

पिछला भी सप्ताह महज कानों कानों में बीत गया
कर्नाटक के नाटक में और हंगामों में बीत गया
सोनम की शादी के कुछ फिल्मी गानों में बीत गया
जिन्ना से जो वक़्त बचा था, तूफानों में बीत गया
कभी रैली में खिल्ली उड़ा ली, या खेला गाली गाली
ज़माना हुआ दंग भाइयो

डाँट डपट कर लोकतंत्र में लोग नहीं पाले जाते
गुंडागर्दी से सिस्टम के दोष नहीं टाले जाते
यदुरप्पा जी यूँ सत्ता के दीप नहीं बाले जाते
हाथ-पाँव बंध जाते हैं तो वोट नहीं डाले जाते
ढूंढो अपने दिमाग़ की भी ताली, चलाओ न दुनाली
उल्टी पड़ेगी जंग भाइयो

एक रोज़ कोई अधिकारी टीवी पर बड़बड़ा दिया
राई को बिन बात अचानक पर्वत जितना बढ़ा दिया
चैनल वैनल एफबी शेफबी क्या से क्या गुड़मुड़ा दिया
सच बतलाओ इस अंधड़ में कौन सा मुद्दा उड़ा दिया
हाय आंधियो की सूचना भुना ली, हवाएं बेच डालीं
ये कैसे हैं लफंग भाइयो

कसमें खाने से योद्धा का धीर टूटने लगता है
लक्ष्य भटक जाता है और उद्देश्य छूटने लगता है
कांग्रेस की फेयरवेल के मनसूबे मत पालो जी
पेड़ जहाँ से काटोगे वो वहीं फूटने लगता है
ऐसी चोटी में गाँठ क्यों लगा ली, कसम कोई खा ली
राहुल को किया तंग भाइयो

तुम निश्चय कर लेते तो फिर आड़ लगाना मुश्किल था
दुश्मन की जय कहने वालों का बच पाना मुश्किल था
देश, राज्य, मंत्रालय, कुलपति सब पर राज तुम्हारा है
फिर भी क्योंकर जिन्ना की तस्वीर हटाना मुश्किल था
बिना बात क्यों ये बात भी बढ़ा ली, ये है जनाबे आली
तुष्टिकरण का रंग भाइयो

वे बोले कि कर्नाटक में बहुमत इनका टच होगा
राहुल गांधी का भाषण अब सीरियसली टू मच होगा
मौसम का अनुमान तलक झूठा साबित हो जाता है
ऐसे में संजय राउत का दावा कैसे सच होगा
देखो ये तो पुलाव हैं खयाली, बिना हथेली ताली
ये बातों की है जंग भाइयो

सारे यार तुम्हारे उनके घर जा बैठे राहुल जी
कई राज्य अपनी ज़िद में तुम निपटा बैठे राहुल जी
कांग्रेस की सारी इज़्ज़त लुटवा बैठे राहुल जी
सिद्धरमैया भी मोदी के गुण गा बैठे राहुल जी
अपने हाथों से लुटिया डुबा ली, बजाते रहो ताली
चाकू पे लगा ज़ंग भाइयो

वही पुरानी काठ की हांडी नहीं चढ़ेगी साहब जी
जनता अपने अनुभव से ही निर्णय लेगी साहब जी
कर्नाटक की हार देखकर इतना तो सीखे होंगे
अब जुमलेबाज़ी से जनता नहीं फँसेगी साहब जी
अपनी ख़ुद की फेयरवेल करा ली, अपनी ही मुंह की खा ली
हारे हो बड़ी जंग भाइयो

घर से उठवाने के दावे को भी त्राटक नहीं मिला
उन्हें सड़क पर लाने वालों को ख़ुद फाटक नहीं मिला
हिन्दू-मुस्लिम, लिंगायत, जिन्ना, तूफान, दलित, अगड़े
इतना सारा नाटक करके भी कर्नाटक नहीं मिला
ईवीएम ने भी राखी खुलवा ली, नज़र फेर डाली
ठगे गए दबंग भाइयो

सच मानो पहले से अब मैच्योर हो गई है जनता
कांग्रेस-बीजेपी में इग्नोर हो गई है जनता
पहले जैसी नहीं रही है, और हो गई है जनता
जुमलों से और ड्रामे से अब बोर हो गई है जनता
जीडीएस ले ले सत्ता की ताली, तुम बैठे रहो ठाली
अब बदलो अपने ढंग भाइयो

✍️ चिराग़ जैन

उत्सव

मेले में भी पहुँचे साथ झमेले लेकर
उत्सव किस सूरत तुमको आकर्षित करते

बाँहें फैलाते होंगे जब खेल-खिलौने
कंगाली के दंश तुम्हें बिलखाते होंगे
आकर्षण उभरा होगा जब मुस्कानों का
लाभ-बचत का तब तुम गणित लगाते होंगे
द्वन्द वहाँ था आशा और निराशाओं का
तुम बढ़कर आशाओं को अपराजित करते

रामकथा से इतनी सीख न पाई तुमने
ठीक दिशा का बाण, अधम का अंत करेगा
अडिग रहो तुम शांत तथागत जैसे बनकर
तेज तुम्हारा हर डाकू को संत करेगा
अभिनय से जीवन का सार ग्रहण करना था
उलझन से ख़ुद को कुछ देर विभाजित करते

सरगम की पहली कक्षा से ऊब गए तो
अनहद का संगीत नहीं साधा जाएगा
धरती के प्राणी को अवरोधक माना तो
ईश्वर सा मनमीत नहीं साधा जाएगा
हर झूले की पींग तुम्हें ही लेकर उछले
ऐसी इच्छाओं को क्षण भर विस्मृत करते

✍️ चिराग़ जैन

सच कहने पर रोक

कहने की सुविधा दिलवाई जाएगी
सच कहने पर रोक लगाई जाएगी

पागल हाथी की जंगली चिंघाड़ों से
बंसी की आवाज दबाई जाएगी

पहले मुद्दों से तो ध्यान हटाने दो
फिर शायद तस्वीर हटाई जाएगी

साहब मरहम लेकर आते ही होंगे
तब तक सबको चोट खिलाई जाएगी

जनता दंगों में फाके करती होगी
हाकिम के घर खीर बनाई जाएगी

✍️ चिराग़ जैन

उत्सव के मधुघट

पीड़ा के सागर मंथन से
उत्सव के मधुघट पाएंगे
चाहे कण्ठ रुंधा हो फिर भी
हम जीवन भर मुस्काएँगे

यादों के जलते छालों पर
भावों का मरहम धर देंगे
जीवन के उघड़े घावों में
शब्दों की हल्दी भर देंगे
सरगम के छू लेने भर से
ग़म के फोड़े भर जाएंगे
चाहे कण्ठ रुंधा हो फिर भी
हम जीवन भर मुस्काएँगे

हालातों का गर्जन होगा
चिंता की बिजली कौंधेगी
शंका के तूफ़ान उठेंगे
आंधी सपनों को रौंदेगी
फिर भी धरती मुस्काएगी
नभ में मेघ अगर छाएंगे
चाहे कण्ठ रुंधा हो फिर भी
हम जीवन भर मुस्काएँगे

आँसू से धुलकर मुस्कानें
शायद और निखर जाएँगी
सूरज जलकर बुझ जाएगा
फिर भी भोर सँवर जाएँगी
पतझर के मारे ठूंठों पर
वासंती मौसम आएंगे
चाहे कण्ठ रुंधा हो फिर भी
हम जीवन भर मुस्काएँगे

गीत रचेंगी भीगी पलकें
अधरों का विस्तार बढ़ेगा
अन्तस् पिघलेगा पीड़ा से
मुस्कानों से प्यार बढ़ेगा
गाते-गाते जीने वाले
हँसते-हँसते मर जाएंगे
चाहे कण्ठ रुंधा हो फिर भी
हम जीवन भर मुस्काएँगे

✍️ चिराग़ जैन

अंधेरा खुद पिघलकर आ गया

अकेला छोड़ दे जब ये मुकद्दर, कौन आता है
किसी के आँसुओं से आँख भरकर कौन आता है

अंधेरा खुद पिघलकर आ गया रौशन चिरागों में
हमारी बाँह में वरना सिमटकर कौन आता है

हमें तो उम्र भर बस तीरगी से जंग लड़नी है
चिरागों की खबर लेने पलटकर कौन आता है

कमसकम झूठ तो हरगिज नहीं किस्से फरिश्तों के
मुसीबत में हवा का रुख बदलकर कौन आता है

हम अपना दर्द लेकर राह पर नजरें बिछाए हैं
जरा देखें फरिश्ता या सितमगर, कौन आता है

✍️ चिराग़ जैन

ज़माना हुआ तंग भाइयो

त्रिपुरा में इक विप्लव अपनी सारी मर्यादा भूला
मोदी जी ने शी के संग फिर चाइना में झूला झूला
लालक़िले पर डालमिया के कब्ज़े का हल्ला-गुल्ला
राहुल को चैलेंज किया है पीएम ने खुल्लमखुल्ला
येदुरप्पा ने बुकिंग भी करा ली, शपथ रट डाली
कर्नाटक की है जंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

बिन मतलब के लंबे-लंबे भाषण पेल रहे हो तुम
छोटे बच्चों से भी बोगस दावे ठेल रहे हो तुम
समझ न आता आख़िर कैसे ख़ुद को झेल रहे हो तुम
कभी-कभी ऐसा लगता है घर-घर खेल रहे हो तुम
कभी बोलने की बाज़ियां लगा लीं, या शायरी सुना ली
उड़ती रही पतंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

देश फूँक कर अपनी कोठी जगमग ही तो करनी है
सिर्फ़ क्रीज़ पर टिके हुए कुछ ठक-ठक ही तो करनी है
तुम आपस में शर्त लगाकर टाइम पास करो अपना
क़ाग़ज़ देखो या मत देखो, बकबक ही तो करनी है
ये तो जनता है बड़ी भोली-भाली, बजाती रही ताली
बनी रही उमंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

जो चुप्पी साधे थे वो भी होंठ खोलना सीख गए
बीजेपी वाले दलितों का मोल तोलना सीख गए
ख़ुद मोदी जी ने माना है, अच्छे दिन तो आए हैं
कांग्रेसी मोदीशासन में झूठ बोलना सीख गए
कभी जातियों पे रोटियाँ पका लीं, कहीं पे बकी गाली
यूँ चढ़ता रहा रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

सब अपनी-अपनी कहते हैं, कौन बताओ होश में है
सिर्फ़ जीत जाने की इच्छा हर इक के उद्घोष में है
उसकी वैसी हरक़त जितना पैसा जिसके कोष में है
बीजेपी तो मस्ती में है, कांग्रेस आक्रोश में है
कहीं मावस में भी है दीवाली, कहीं पे जेब ख़ाली
ये वोट की है जंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

इस गर्मी में काॅमेडी का हीटर किसने आॅन किया
ये कहते हैं पाण्डव दल ने कौरव दल को फोन किया
चंद दिनों में टाॅप इन्होंने बकवासों का ज़ोन किया
दिल्ली ले जाकर भाई को जैसे-तैसे मौन किया
कभी पान की दुकान खुलवा ली, या गाय पलवा ली
ये कैसा नया रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

मनोरंजन पर भारी इस विप्लव के छक्के-चैके हैं
इस भाई ने दही-बड़े भी देसी घी में छौंके हैं
जब ज़ुबान चलती है तो फिर कौन जो उसको रोके है
नहीं डायना अच्छी लगती, ऐश्वर्या जी ओके हैं
जो दबी थी वो जी की कह डाली, यूँ आरज़ू निकाली
जवानी की उमंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सब कुछ प्राइवेट हुए सर जी
हटी सब्सिडी गैस तेल के ऊँचे रेट हुए सर जी
लालक़िले के केअर टेकर मोटे सेठ हुए सर जी
हमें बताओ टैक्स के पैसे किनकी भेंट हुए सर जी
तुमने अपनी तो सेलरी बढ़ा ली, या रैलियाँ निकालीं
तमाशा करो बंद भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

✍️ चिराग़ जैन

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