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ग़रीबी

रुके आँसू, दबी चीखें, बंधी मुट्ठी, भिंचे जबड़े इन्हीं के तर्जुमे से मुल्क़ में विस्फोट होता है ये बम रखने का काम अच्छा-बुरा औरों की ख़ातिर है ग़रीबी के लिए तो सिर्फ़ सौ का नोट होता है ✍️ चिराग़...

ख़ुशियों की तस्वीर

मन के आंगन में मुस्कानों की जागीर बनानी है अपने ही हाथों से ख़ुद अपनी तक़दीर बनानी है हम कुछ रंग चुरा लाए हैं ख़ुशियों के गुलदस्ते से इन रंगों से हमको जीवन की तस्वीर बनानी है ✍️ चिराग़...

बेमतलब का डर

तेरा अहसास मेरे दिल में ही पलता रहा बरसों बयाने-दिल किसी डर से यूँ ही टलता रहा बरसों तेरा दिल भी मेरी ख़ामोशियों को कोसता होगा मेरे दिल को भी बेमतलब का डर खलता रहा बरसों ✍️ चिराग़...

बहाना अनबन का

तू मेरे मन भा जाए या मैं तेरे मन भा जाऊँ तू मुझसे जुड़ता जाए या मैं तुझसे जुड़ता जाऊँ आओ तलाशें कोई बहाना अनबन का, इससे पहले तू मुझसे उकता जाए या मैं तुझसे उकता जाऊँ ✍️ चिराग़...

इक मुक़म्मल बयान

प्यार कब बेज़ुबान होता है लफ्ज़ बिन दास्तान होता है आँख तक बोलने लगें इसमें इक मुक़म्मल बयान होता है ✍️ चिराग़...

वो कश्मीर हमारा है

हिमगिरि की गोदी में पसरा जो इक हरा बगीचा है जिसकी झीलों को पुरखों ने स्वेदकणों से सींचा है जिसके कण-कण में भारत की सौंधी ख़ुश्बू बिखरी है जिसके प्रांगण में हरियाली दिव्य रूप में बिखरी है जहाँ धरा पर स्वर्ग सरीख़ा अद्भुत भव्य नज़ारा है दुनिया माने या ना माने वो कश्मीर...
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