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बचपन नहीं जाता

अगर कुछ शोख़ियों की ओर उसका मन नहीं जाता तो फिर इंसान के मन से कभी बचपन नहीं जाता कोई कितना भी ख़ुद को सख्त दिल कहता रहे लेकिन कभी यादों से पहले प्यार का सावन नहीं जाता भले ही मिट गया दीवार का नामो-निशां भी अब मगर मेरे ज़ेह्न से वो बँटा आंगन नहीं जाता चुभन ही क्यों बहुत...

अवतारी बालक

जीवन के जिस मौसम में आँखें सपने पाला करती हैं कुछ रंग-बिरंगी उम्मीदें जब होश संभाला करती हैं पलकों के भीतर कोई अनगढ़ मूरत ढाली जाती है सरगम साँसों की वीणा पर प्रियतम के गीत सुनाती है वो मौसम जिसमें अपने कुछ कानून बनाए जाते हैं वो मौसम जिसमें मिलन-विरह के नग़में गाए जाते...

लरजिश हमारे लहजे में

कहाँ अचानक मिले हैं हम-तुम, यहाँ के मौसम में शायरी है जवान रुत, मदभरी हवाएँ, ये शाम जैसे ठहर गई है महकती रुत उनके सुर्ख़ नाज़ुक लबों को छूकर बहक रही है सनम के भीगे बदन की लरजिश हमारे लहजे में आ गई है जो सोच की हद में आ गया हो, वो चाहे जो भी हो आदमी है किसी तरह भी समझने...

तेरी दुश्मनी भी क़माल है

न जहाँ में तेरा जवाब है, न नज़र में तेरी मिसाल है तेरी दोस्ती भी क़माल थी, तेरी दुश्मनी भी क़माल है क्या हसीन खेल है ज़िन्दगी, कभी ग़मज़दा, कभी ख़ुशनुमा कभी एक उम्र का ग़म नहीं, कभी एक पल का मलाल है मेरी सोच बदली तो साथ ही, मेरी ज़िन्दगी भी बदल गई कभी मुझको उसका ख़याल था, कभी...

नया साल

नये घटनाक्रम की पोटली समय के कंधे पर लटकाये एक और नया साल आ खड़ा हुआ है जीवन की पगडंडी पर। बिछाते हुए शुभकामनाओं के फूल इस बार भी स्वागत करेंगे सभी लोग इस अजनबी का अपने-अपने घर में। खोल-खोलकर पोटली में बन्द घटनाओं को शुभ-अशुभ अच्छे-बुरे सुख-दुःख तथा ऐच्छिक-अनैच्छिक का...

नज़र

पलक गिरते ही पल में खेल सारे देख लेता हूँ मैं इनसे आँख को ढँक कर सितारे देख लेता हूँ मेरी ये बन्द पलकें दूरबीनों से कहाँ कम हैं मैं इनमें ज़िन्दगी भर के नज़ारे देख लेता हूँ ✍️ चिराग़...
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