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गीत की चेतावनी

आज फिर एकांत की उंगली पकड़कर सोच को अपनत्व की बाँहों में भरकर कोई बोला प्राण का संगीत हूँ मैं ठीक से पहचानिए ना, गीत हूँ मैं अक्षरों के वस्त्र ओढ़े हैं बदन पर भंगिमा में भाव का विस्तार देखो शब्द के आभूषणों से हूँ अलंकृत नयन में रस की अलौकिक धार देखो मैं सुदामा की...

ऊब का गीत

आस मंज़िल की किसी को भी नहीं है आदमी को खींचती है राह उसकी प्यार का मतलब नहीं है प्यार केवल प्यार का आधार है परवाह उसकी मेघ से ऊबे तो इक सूरज बुलाया सूर्य दहका, देह ने बरसात कर दी रात से उकता गए तो दिन उगाया थक गए दिन से तो फिर से रात कर दी जो हमारे पास है उससे दु:खी...

सच बोलना पाप है

क्या कहा, तुम सच कहोगे और ज़िंदा भी रहोगे झूठ का चाबुक तुम्हारी खाल खींचेगा समझ लो और फिर सारा ज़माना आँख मीचेगा समझ लो ख़ुद नदी ने इस तरह के दाँव सारे रख दिए हैं नाव जैसे दिख रहे पत्थर किनारे रख दिए हैं पेड़, जिसकी छाँह के दम पर भिड़े हो धूप से तुम धूप ने उस पेड़ की...

आचार्य विद्यासागर की समाधि

सभी का मन सशंकित हो रहा था बहुत दिन से कहीं कुछ खो रहा था जुड़े सब हाथ ढीले पड़ गए थे पनीले नेत्र पीले पड़ गए थे तपस्या चरम तक आने लगी थी ये भौतिक चर्म कुम्हलाने लगी थी व्रतों पर नूर इतना चढ़ गया था कि तन का रंग फीका पड़ गया था हुई जर्जर तपस्यायुक्त काया तो यम...

विदा आचार्य श्री

आज संतत्व का एक उदाहरण साकार से निराकार हुआ है। आज तपश्चर्या का एक बिम्ब अंतर्धान हुआ है। निश्छल दिगंबरत्व की एक गाथा का पटाक्षेप हुआ है। आज आस्था और विवेक के एक अद्वितीय संगम की समाधि हुई है। आध्यात्मिक ऊर्जा के विराट केंद्र का स्थानांतरण हुआ है। आचार्य श्री...

मन रह गया अयोध्या में…

जहाज ने दिल्ली का रन-वे छोड़ा और मन राम के आचरण की कथा बाँचने लगा। खिड़की से बाहर झाँका, तो सूरज के तेज प्रकाश से आँखें चुंधिया गईं। भौतिक आँखें बंद हुई तो मन राम के नयनाभिराम चरित्र पर त्राटक करने लगा। अनायास ही राम से कुछ मांगने की उत्कंठा जगी तो याचना राम-आचरण की...
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