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भाजपा और चुनाव

केलकूलेटर ने भी पकड़े हैं कान ये जादू मन्तर कैसे सीखा कहीं मिलते नहीं हाथों के निशान ये जादू मन्तर कैसे सीखा नगालैंड में ख़ुद प्रत्याशी वोट न करने आता त्रिपुरा में वोटिंग पर्सेंटेज सौ से ऊपर जाता सौ पर्सेंट से भी ज़्यादा मतदान ये जादू मन्तर कैसे सीखा प्रत्याशी के...

अरुण जैमिनी: एक नाम नहीं, एक किरदार

“छोड़ ना यार, क्या फरक पड़ता है।” -यह वाक्य कोरा तकियाक़लाम ही नहीं, अपितु अरुण जी के जीवन का मूल सिद्धान्त भी है। जीवन की बड़ी से बड़ी भँवर से भी वे इसी एक वाक्य की डोर थामकर किनारे आ लगते हैं। पहले मुझे ऐसा लगता था कि वे दूसरों की समस्या को छोटा समझते हैं, इसीलिए...

माहेश्वर तिवारी: गीत का उदाहरण

एक सम्पूर्ण गीत को यदि मनुष्य बना दिया जाए तो उसका आचार-व्यवहार लगभग माहेश्वर दा जैसा होगा। संवेदना में डूबकर तरल हो उठी आँखें उनके गीतकार नहीं, ‘गीतमयी’ होने का प्रमाण थीं। आज वे आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं। मृदु वाणी किसे कहते हैं, इसका उदाहरण आज हमसे...

ईद

ईद के चांद अगर हो तो बस इतना कर दे फिर से इस मुल्क के लहजे में मिठास आ जाए ✍️ चिराग़ जैन

विजय का मंत्र

जो समर्पित हो गया मजबूर होकर वह तुम्हारा हित करेगा; भूल जाओ जो न अपने मन मुताबिक जी रहा हो वह तुम्हारे हित मरेगा; भूल जाओ कर्ण इक एहसान के वश में विवश थे द्रोण इक प्रतिशोध के कारण खड़े थे शल्य इक षड्यंत्र से आहत हुए थे भीष्म इक प्रण की विवशता में लड़े थे मन बचा पाया...

अहंकार का अंत

बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन रक्षकुल के लिए वो काल सिद्ध हो गया ✍️...
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