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आचरण श्रीराम जैसा

राजवैभव की नहीं है चाह कोई कीर्ति की, यश की नहीं परवाह कोई जय-पराजय की घड़ी में मन सहज हो शोक हो, भय हो, न हो उत्साह कोई राम, मुझको दो भले मत आवरण श्रीराम जैसा दे सको तो, दो मुझे बस आचरण श्रीराम जैसा जग जिसे पाषाण माने, देख लूँ मैं साँस उसकी जो नदी-तट पर खड़ा हो, जान...

मूल प्रवृत्ति

सामान्यतया राम की मूर्ति धनुष से पहचानी जाती है, और राम का चरित्र मृदुता से! इसके ठीक विपरीत कृष्ण की मूर्ति बाँसुरी से पहचानी जाती है किन्तु कृष्ण का चरित्र एक योद्धा का चरित्र है। राम कंधे पर धनुष रखकर विनम्र जीवन जीते हैं और कृष्ण अधरों पर बाँसुरी रखकर राजनैतिक...

शबरी

नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...

भूल

क्यों भला भाती नहीं शीतल नदी की धार यूँ समझ लो आप अपनी प्यास को भूले हुए हो ख़ुश हुए तो भूल बैठे दर्द का उपकार रो पड़े तो प्राण के उल्लास को भूले हुए हो आज से पीछा छुड़ाकर भागते हो एक कोरे ख़्वाब के संग जागते हो क्यों हज़ारों ख़्वाहिशों का ढो रहे हो भार आप शायद वक़्त...

अहल्या

साँस न थी पर आस की डोर पे जीवित थी दुखियारी अहल्या शाप के ताप को, स्वर्ग के पाप को झेल रही थी बेचारी अहल्या देखने में बस पाहन थी, मन में धरती से थी भारी अहल्या देखो शिला में भी प्राण बहे जब राम ने छूकर तारी अहल्या ✍️ चिराग़...

अनाड़ी का आनंद

जिसे नाचना आता है वह अच्छा डांस करता है, लेकिन जिसे नाचना नहीं आता वह मज़ेदार डांस करता है। ✍️ चिराग़...
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