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नए घर में

नए फ्लैट की दीवारों पर धीरे-धीरे उभर रहा है हमारा घर माॅड्यूलर किचन के खोपचों से आँख बचाकर एक कोने में पालथी मारकर बैठ गया है सरसों के तेल का पीपा सभी नए कंटेनरों के बीच चुपके से जा छुपी है युगों पुरानी हींग की डिब्बी! बरसों से इकट्ठे हुए शो-पीस चहक कर जा बैठे हैं...

परिस्थितियों की खिल्ली

हम अक्सर राजनीति से नाराज़ रहते हैं कि राजनीति असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए फालतू के विवादों में क्यों उलझाती है; हमें स्वयं से भी यह प्रश्न पूछना चाहिए कि हम भी वास्तविक विषयों से भटककर फालतू विवादों में क्यों उलझते हैं। राहुल गांधी गुरुद्वारे गए, मोदी जी...

पूर्वाग्रही हम

पुलिसकर्मी सड़क पर किसी रिक्शावाले को गरियाते हुए दिखाई देता है, तो हम पुलिसकर्मियों को राक्षस और रिक्शावाले को बेचारा मान बैठते हैं। लेकिन यही रिक्शावाले जब पूरी सड़क घेरकर आपको निकलने का रास्ता नहीं देते, तब हमें ये रिक्शावाले दुष्ट और पुलिसकर्मी रिश्वतखोर लगने लगते...

विश्वास कीजिए

विश्वास कीजिए, राजनीति ने हमें वहाँ तक पहुँचा दिया है, जहाँ उम्मीद की हर लौ अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। विश्वास कीजिए, हमें अपनी संतानों को इस दौर के उस पार सुरक्षित पहुँचाना है तो हमें स्वार्थी होना पड़ेगा। पूरा देश डकार जानेवाली राजनीति हमें दशकों से यह...

संवेदना पर राजनीति की परत

हम संवेदनात्मक रूप से काफ़ी परिपक्व हो चुके हैं। किसी भी घटना पर होने वाली राजनीति ने हमारी कोमल रोमावली के ऊपर ऐसी मोटी परत चढ़ा दी है कि हम किसी भी घटना को देख सुनकर सिहरते नहीं हैं। आज सहारनपुर से एक ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा के सामूहिक बलात्कार की ख़बर पढ़ी। फिर...
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