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हम संवेदनात्मक रूप से काफ़ी परिपक्व हो चुके हैं। किसी भी घटना पर होने वाली राजनीति ने हमारी कोमल रोमावली के ऊपर ऐसी मोटी परत चढ़ा दी है कि हम किसी भी घटना को देख सुनकर सिहरते नहीं हैं।
आज सहारनपुर से एक ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा के सामूहिक बलात्कार की ख़बर पढ़ी। फिर देखा कि सोशल मीडिया पर एक तबका योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर ताने मारने लगा है। दूसरा तबका राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुए बलात्कारों की याद दिलाकर इस ताज़ा घटना से ध्यान हटाने पर आमादा है।
डूब मरना चाहिए इन दोनों तरह के ट्रोलियों को। राजनीति ने हमें कितना वीभत्स बना डाला है कि अपनी राजनैतिक निष्ठा के लिए हम इतने अंधे हो गए। एक नन्हीं बच्ची नोच डाली गई और हम उसमें कांग्रेस-भाजपा देख रहे हैं।
मुझे याद है कि एक अदद लड़की इसी वर्ष के प्रथम प्रहर में दिल्ली की सड़कों पर घसीट कर मार दी गई थी। “गाड़ी के नीचे कई किलोमीटर तक घसीटी लड़की” -इस ख़बर की सनसनी पर मीडिया ने ख़ूब टीआरपी बटोरी। नया साल उस लड़की की लाश से प्रारम्भ हुआ। लेकिन 24 घण्टे के भीतर पता चला कि जिस गाड़ी के नीचे लड़की को घसीट कर मारा गया, उसमें बैठे चार शख़्स में से एक व्यक्ति किसी राजनैतिक दल का नेता था। यह सूचना मिलते ही ख़बर बदल गई। मरनेवाली लड़की को कॉलगर्ल सिद्ध किया जाने लगा और कुछ ही घंटों के बाद ख़बर का नाम-ओ-निशान ग़ायब हो गया। मैं आज तक सोच रहा हूँ कि यदि कोई अपराधी भी है तो भी उसे सड़क पर घसीटकर मार देने का अधिकार किसी अन्य नागरिक अथवा राजनेता को कैसे दिया जा सकता है!
अभी हाल ही में राजस्थान से एक महिला को उसी के रिश्तेदार द्वारा नग्न करके घुमाने की घटना पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। सहारनपुर की ताज़ा घटना पर भी कुछ ही घंटों में सभी आरोपी गिरफ्तार हो गए हैं।
यदि हम इन घटनाओं में कांग्रेस-भाजपा, हिन्दू मुस्लिम, ब्राह्मण-दलित का एंगल देखना बंद कर देंगे तो कार्यपालिका अधिक आसानी से इन अपराधों पर नियंत्रण कर सकेगी। अन्यथा हम हर अपराध में किसी राजनेता को घेरने की कोशिश करेंगे और राजनीति ख़ुद को बचाने के लिए पूरे सिस्टम का और आपकी सोच तक का बलात्कार करके छोड़ देगी।
ध्यान रखिए, अपराध की कोई जाति नहीं होती। अपराध का कोई धर्म नहीं होता। अपराध की कोई विचारधारा नहीं होती। हाँ, विचारधाराओं के अपराध हमेशा से होते आए हैं। अगर हम इन विचारधाराओं से प्रभावित होकर संवेदनहीन हो गए हैं तो समझ लें कि हम इन अपराधों में बराबर के उत्तरदायी हैं।
✍️ चिराग़ जैन

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