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आधुनिक गणितज्ञ

माननीय आर्यभट्ट से कहीं आगे चीज़ हैं। वे एक और एक ग्यारह कभी नहीं करते, अपितु 5 और 6 ग्यारह करते हैं। प्लस का निशान (➕️) न दिखा तो 56; वरना 11 तो है ही..! इन्होंने छोटी संख्या में से बड़ी संख्या को घटाने जैसे उल्टे-सीधे प्रयोग कभी नहीं किए। मामला हमेशा सीधा-सपाट रखा;...

कुएं में भांग

मन यह सोचकर आतंकित है कि हम उस स्थिति तक आ चुके हैं जहाँ कुँआ और खाई में से किसी एक को चुनने की विवशता है। एक ओर वे हैं, जिनसे छीनकर सत्ता भाजपा को दी गई थी और दूसरी ओर ये हैं जो ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर इन्हें सत्ता से बाहर न किया जा सके। हमें...

कृष्ण का तो चक्र भी ‘सुदर्शन’ है

नंदलला, कन्हैया, कान्हा, गिरिधर, मुरलीधर, गोपाल, मोहन, गोविन्द, मधुसूदन, केशव, रणछोड़, माधव, श्याम, वासुदेव, पीताम्बर… और भी दर्जनों संज्ञाएँ मिलकर थोड़ी-थोड़ी झलक भर दे पाती हैं एक कृष्ण की। और ये सब संज्ञाएँ कृष्ण के नाम भर नहीं हैं, अपितु ये सब नाम कृष्ण के जीवन...

अस्तित्व का मूल्य

हाँ, जगत् में एक कण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस कण की चमक दुगुनी करेगा हाँ, समय में एक क्षण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस क्षण की दमक दुगुनी करेगा साँस है बस दास प्राणों की किसी आह्लाद के बिन हर इमारत ताश का घर है महज; बुनियाद...

नफ़रत की फसल

घृणा और द्वेष के बीज अब फलने लगे हैं। विषबेल ने एक बड़े से वृक्ष को जकड़कर उसके प्राण सोखने प्रारंभ कर दिए हैं। रंग-बिरंगे फूलों से सजे उद्यान का हर फूल दूसरे रंग के फूलों से नफ़रत करने लगा है। किसी डाल को कटते देखकर अन्य डालियाँ ख़ुश होने लगी हैं। क्यारियों ने अपनी...
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