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आषाढ़ के दो दिन

एक वर्ष पूर्ण हो गया। आज ही के दिन सुबह दस बजे अपने घर को और घर के दरवाज़े पर खड़ी माँ को जी भरकर निहारने के बाद मैं अस्पताल पहुँच गया था। मेदांता के एक बेड पर मेरा नाम लिख दिया गया था। हाथ पर एक पट्टा बांध दिया गया था, जिसके रहते अस्पताल की अनुमति के बिना सशरीर उस...

इतना-सा प्यार

अपनेपन के बाहुपाश में धड़कन ने ये शब्द सुनाए- “अलग-अलग कर्त्तव्य रहें; पर आपस का अधिकार बहुत है।” बस इतना-सा प्यार बहुत है सबकी अपनी-अपनी गति है, सबका अपना-अपना पथ है सूरज के कुनबे में लेकिन, ना कोई इति है ना अथ है हम-तुम अगर निकट से गुज़रे, इस अनवरत अथक...

शऊर

शऊर हो तो नश्तर से भी गुदगुदी की जा सकती है ✍️ चिराग़ जैन

भीतर-बाहर

ख़ुश होते तो आँख चमकती मन हँसता तो देह दमकती डर लगता तो दिल की धड़कन ख़ुद चेहरे तक आन धमकती क्या होंठों के खिंच जाने को हम सचमुच मुस्कान कहेंगे क्या आँखों के मुंदने को ही जीवन का अवसान कहेंगे हाथ-पैर हिलते-डुलते हैं, पर मन में उत्साह नहीं है साँसें आती हैं, जाती हैं पर...

सनातन धर्म और सहिष्णुता

सनातन संस्कृति की सबसे ख़ूबसूरत बात यही है कि यहाँ भक्त और भगवान के मध्य जो बातचीत होती है, वह केवल भक्तिरस तक ही सीमित नहीं है। बल्कि उसमें काव्य के अन्य सभी रसों की सृष्टि सम्भव है। विश्व के अन्य किसी धर्म में यह चमत्कार सम्भव नहीं है। किसी अन्य धर्म के आराध्य की...
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