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ओशो कम्यून की पहली शर्त

ख़ुद से मिलने की ख़ुशी क्या होती है, इसका एहसास मुझे तब हुआ जब मैंने कम्यून में प्रवेश किया। हर चेहरे पर एक नैसर्गिक प्रसन्नता, हर आँख में एक प्राकृतिक चमक, हर पाँव में एक अनायास थिरक …उत्सव वहाँ आयोजित नहीं, घटित हो रहा था। वहाँ सब अपने पूरे अस्तित्व के साथ घूम...

इमारत और झोंपड़ी

झोंपड़ी को यह नहीं भूलना चाहिए कि बड़ी इमारत का मलबा भी झोंपड़ी से ऊँचा होता है। और मलबे को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि मलबा कितना भी ऊँचा हो जाए, उसे इमारत नहीं कहा जा सकता। इमारत ध्यान रखे कि चाटनेवाले दीमक कहलाते हैं और मरम्मत की आवाज़ें शोर होती हैं, संगीत नहीं!...

आराम का एक दिन

रात काटें जागकर हम दिन बिताते भागकर हम व्यस्तता से घिर रहे हैं क्यों उनींदे फिर रहे हैं इस थकन के भाग्य में आराम कुछ घोलें आओ कुछ पल चैन से सो लें एक दिन ऐसा जुटा लें, जब कोई भी काम ना हो आँख में ख्वाहिश नहीं हो, श्वास में संग्राम ना हो व्यस्तता के ढेर से बस एक दिन...

हनुमान : भक्त से मित्र हो जाने की यात्रा

अगाध समर्पण का साकार रूप हैं हनुमान। निस्पृह भक्ति का शाश्वत उदाहरण हैं हनुमान। श्रीमत् हनुमान की वीरता अन्य किसी भी वीर की वीरता से इसलिए विशेष है, क्योंकि हनुमान की वीरता समर्पण से उत्पन्न हुई है। श्रीराम के प्रति वीरवर हनुमान का जो समर्पित प्रेम था, उसी की कुक्षि...

सत्य

सत्य के लिए व्याकरण की नहीं अंतःकरण की आवश्यकता होती है। ✍️ चिराग़ जैन
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