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राम: भारतीय संस्कृति की आत्मा का एक नाम

राम… एक ऐसा नाम, जिसका उच्चारण जितने गहरे स्वर में किया जाए, मन उतना ही आराम पाने लगता है। राम… एक ऐसा नाम, जिसको पुकारने के लिए किसी विशेष मनोदशा की आवश्यकता नहीं पड़ती। जो हर परिस्थिति के अनुरूप लय धारण करने में सक्षम है। जिसका उच्चारण यकायक किसी साकार की...

चिराग़ों के घर नहीं होते

सदा तो सँग तलक दर-ब-दर नहीं होते कहा ये किसने चिराग़ों के घर नहीं होते अभी असर न दिखा हो तो इंतज़ार करो हैं ऐसे दांव भी जो बेअसर नहीं होते ग़मों की धूप में नाज़ुक बदन मुफ़ीद नहीं गुलों के जिस्म नरम, सूखकर नहीं होते खुद अपना बोझ उठाने में कोई हर्ज़ नहीं पराये पाँव बहुत...

कृष्ण का तो चक्र भी ‘सुदर्शन’ है

नंदलला, कन्हैया, कान्हा, गिरिधर, मुरलीधर, गोपाल, मोहन, गोविन्द, मधुसूदन, केशव, रणछोड़, माधव, श्याम, वासुदेव, पीताम्बर… और भी दर्जनों संज्ञाएँ मिलकर थोड़ी-थोड़ी झलक भर दे पाती हैं एक कृष्ण की। और ये सब संज्ञाएँ कृष्ण के नाम भर नहीं हैं, अपितु ये सब नाम कृष्ण के जीवन...

अस्तित्व का मूल्य

हाँ, जगत् में एक कण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस कण की चमक दुगुनी करेगा हाँ, समय में एक क्षण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस क्षण की दमक दुगुनी करेगा साँस है बस दास प्राणों की किसी आह्लाद के बिन हर इमारत ताश का घर है महज; बुनियाद...
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