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अयोध्या

शोभ रही नगरी सरयू-तट, खोज रहे उपमा तुलसी
नील सरोवर में दमके, जिस भाँति कली इक रातुल-सी
मानस-मानस राम बिराजत, आंगन-आंगन माँ तुलसी
या नगरी वरनैं न थके, क्या तो आदिकवि, अरु क्या तुलसी

✍️ चिराग़ जैन

बिरहन की होली

आँखन में कजरा धर राधा ने श्याम के रूप को नैन बसायो
श्याम ने बाँसुरी होंठ लगाय के राधा के होंठों पे साज सजायो
राधा ने श्याम को श्याम ने राधा को होरी की भोरी ही रंग लगायो
देह से देह रही बिरहा पर नेह से नेह नहीं बिसरायो

✍️ चिराग़ जैन

सिस्टम का सिस्टम

पड़ी कुँए में भांग है, भली करे करतार
होरी के घर लूट में, मुखिया हिस्सेदार
मुखिया हिस्सेदार, शिक़ायत किससे करता
आखिर थाने में जा पहुँचा डरता-डरता
लिखा रपट में गया, रुपैये गए जुए में
मिला उसे यह ज्ञान, भांग है पड़ी कुँए में

✍️ चिराग़ जैन

सुंदरी ऑन फेसबुक लाइव

छोरी बैठी लाइव पर, दीखन कू तैयार
चार छिछोरे आ गए, भली करे करतार
भली करे करतार, कैमरा हिला अचानक
आधे मेकअप का पूरा व्यू मिला अचानक
जल्दी से ऑफलाइन हो गई कह के सोरी
निक्कर पर साड़ी अटकाए बैठी छोरी

✍️ चिराग़ जैन

बिरहन का सवैया

ऐसी दारी की आई बीमारी अबै, सब देस के आँगन-द्वार बंधे हैं
कौन गली भर्तार बंधे, काऊ खोह में सोलह सिंगार बंधे हैं
इत गाय के मौह पे छीको बंधो, उत खूटे पे दूर बिजार बंधे हैं
जमुना जी के पार फँसी बंसुरी, अरु ओंठ मुए इस पार बंधे हैं

✍️ चिराग़ जैन

इंसानियत के क़त्ल की अफ़वाह उड़ा दो

कुर्सी के लिए क़ौम की परवाह उड़ा दो
नारों की आंधियों में हर इक आह उड़ा दो
लफ़्ज़ों की आग से भी न गर मुल्क जले तो
इंसानियत के क़त्ल की अफ़वाह उड़ा दो

✍️ चिराग़ जैन

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