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नवजीवन

सबकी नज़र पीर से सूखी, मेरी नज़र ख़ुशी से नम है जिसको सबने घाव कहा है, वह नवजीवन का उद्गम है क्या सोचा था, शाख कटेगी तो मैं माली को कोसूंगा जो छिल-छिलकर क़लम बन गयी, मैं उस डाली को कोसूंगा जिसके दम पर पूरा गुलशन स्वस्थ रहा है, पुष्ट रहा है क्या सोचा था, इस गुलशन की उस...

स्वयं का प्रसव

ऐसा लगता था सब राहें अब इसके आगे धूमिल हैं जो भी है, जितनी भी है; बस यह ही जीवन की मन्ज़िल है लेकिन घबराकर हिम्मत की हत्या करना ठीक नहीं था जब तक मौत नहीं आ जाती, तब तक मरना ठीक नहीं था जाने कौन घड़ी, अगले पल जीवन को लाचार बना दे जाने कौन घड़ी, पल भर में हर भय का उपचार...

यात्रा

अब तक पथ पर फूल बिछे थे नयन लुभावन चित्र खिंचे थे अब इक कंकड़ चुभ जाने से, मैं रस्ते को दोष न दूंगा जिस क्यारी को हाथ लगाया, उसमें फूल खिले; क्या कम है? जिस पगडण्डी को अपनाया, उस पर मीत मिले; क्या कम है? रेले-मेले, खेल-तमाशे, उत्सव के पल पाये यहाँ से अब कुछ सन्नाटा...

प्रतीक्षा

कब उगेगा दिन, तुम्हारे आगमन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कब कोई आकार होगा इस सपन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं युगों से रोज़ लिख-लिखकर संदेशे बादलों के हाथ भेजे जा रहा हूँ शुद्धतम जल से चरण धोऊँ तुम्हारे आँसुओं को भी सहेजे जा रहा हूँ कब मुझे...

श्मशानों में चहल-पहल है

सबके एकाकी मन में हैं जाने कितनी शोक सभाएँ पीपल के पेड़ों ने पूछा इतने घण्ट कहाँ लटकाएँ हर पल पर डर का कब्ज़ा है, हर क्षण पर दहशत के पहरे घाव दिलों पर इतने गहरे, हँसना भूल चुके हैं चेहरे आँखें रोकर पूछ रही हैं कितने आँसू और बहाएँ पीपल के पेड़ों ने पूछा इतने घण्ट कहाँ...

हिम्मत का गीत

ध्वंस मुँह बाये खड़ा है मृत्यु का पहरा कड़ा है घाट धू-धू जल रहे हैं हर लहर मातम जड़ा है यह बिखरने का नहीं, हिम्मत जुटाने का समय है मौत के पंजे से जीवन छीन लाने का समय है मृत्यु का विकराल वैभव इस जगत् पर छा चुका है आँसुओं के अर्घ्य से कब काल का ताण्डव रुका है अब हमें अड़ना...
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