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जैन धर्म के अनुयायी

हम जैन धर्म के अनुयायी हम नियम निभाने वाले हैं श्रावक अणुव्रत के धारी हैं श्रमणों ने महाव्रत पाले हैं हम सिद्धशिला का लक्ष्य बना, अरिहंतों की पूजा करते आचार्य कथित पथ को तजकर, नहीं काम कोई दूजा करते पाठक परमेष्ठी से पढ़कर मुनि मार्ग को जाने वाले हैं हम जैन धर्म के...

टिकट लेते आना

चाहे झूठ बोल के, चाहे भेद खोल के लेते आना, टिकट लेते आना तुम साइकिल पर पर चढ़ जाना इक टोपी लाल लगाना थोड़ा डण्ड पेल के थोड़ा दण्ड़ झेल के लेते आना टिकट लेते आना तुम कमल का फूल खिलाना पूरे भगवा रंग जाना जय श्री राम बोल के जट श्री श्याम बोल के लेते आना टिकट लेते आना तुम बिन...

तो क्या हुआ

तो क्या हुआ, अगर जीवन में थोड़ा-सा संत्रास लिखा है जिसने जितनी पीड़ा झेली, उतना ही इतिहास लिखा है जिस काया में गर्भ विराजे उसकी रंगत खो जाती है अन्न उपजना होता है तो धरती छलनी हो जाती है जो डाली फलती है उसको बोझा भी ढोना पड़ता है भोर अगर नम होती है, तो रातों को रोना पड़ता...

कविता बुन लेता हूँ

शोर-शराबे में भी दिल की धड़कन सुन लेता हूँ यूँ कविता बुन लेता हूँ इस दुनिया के छोटे-छोटे हिस्से घूम रहे हैं लोग नहीं हैं, दो पैरों पर किस्से घूम रहे हैं होंठों पर मुस्कान दिखी, मस्तक ग़मगीन दिखे हैं हर चेहरे को पढ़कर देखो, कितने सीन लिखे हैं इस सारी सामग्री में से मोती...

अब उसकी कुछ आस नहीं है

सूखी हुई नदी के तट पर नौका लेकर आने वाले जिस कलकल को ढूंढ रहा है अब उसकी कुछ आस नहीं है चलते-चलते बहा पसीना, ठहर-ठहर कर नदिया सूखी तू होता जाता था लथपथ, वो होती जाती थी रूखी लहर-लहर लहरा-लहरा कर तुझको पास बुलाने वाले जिस आँचल को ढूंढ रहा है अब उसकी कुछ आस नहीं है माना...

दूसरा आयाम

जो प्रतीक्षा आँख में शबरी बसाए जी रही है वह प्रतीक्षा राम के भी पाँव में निश्चित मिलेगी धूप जैसी जिस विकलता को सुदामा ने जिया है वह विकलता द्वारिका की छाँव में निश्चित मिलेगी जो महल तक आ गयी होगी युगों का न्याय लेने वह किसी वन में सिसकती इक शिला की आह होगी जो युगों...
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