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मध्यम वर्ग की पीड़ा

तुम लड़ते रहे चुनाव, ओ साब मेरी थाली खाली है रही है मुझसे टैक्स वसूला जाए, उन्हें चढ़ावा जाए मैं देकर भी झिड़की खाऊँ, वो खाकर गुर्राए वो मुझे दिखावें ताव, ओ साब मेरी जेब मवाली है रही है मध्यम वर्ग बनाकर मुझको, दोनों ओर निचोड़ा इन्हें दान दो, उन्हें मान दो, नहीं कहीं...

धरती के गहने हैं पेड़

रंग-बिरंगे पत्तोंवाले धरती के गहने हैं पेड़ मिट्टी के मटमैले तन पर पृथ्वी ने पहने हैं पेड़ क्यारी में ये फूल खिलाते ठण्डी-ठण्डी हवा चलाते धूप चुभे तो छाया लाते बारिश में छतरी बन जाते कभी फलों से लदती डाली कभी फूल लाते ख़ुशहाली साँस सुहाती गंध निराली आँखों को भाती हरियाली...

बोनसाई

आदेशों का दास नहीं है शाखा का आकार कभी ले तक सीमित मत करना पौधे का संसार कभी जड़ के पाँव नहीं पसरे तो, छाँव कहाँ से पाओगे जिस पर पंछी घर कर लें वो ठाँव कहाँ से लाओगे बालकनी में बंध पाया क्या, बरगद का विस्तार कभी कोंपल, बूटे, कलियाँ, डाली; ये सब कुछ आबाद रहे तब ही आती...

बुनियादों की मज़बूती

धूप, कंगूरों की रंगत को चाट गई जब धीरे-धीरे तब बुनियादों की मज़बूती दीवारों के काम आ गई होठों पर ताले लटके थे, संवादों पर बर्फ़ जमी थी आखर-आखर आतंकित था, हर आहट सहमी-सहमी थी सबके अपने-अपने सुख थे, सबके अपने-अपने कमरे तब छोटी-सी एक मुसीबत, परिवारों के काम आ गई फिर...

दशरथ

ना तो किसी रोग से टूटा ना ही समरांगण में हारा जिस राजा का शौर्य अमर था उसको कोपभवन ने मारा उसकी देह धराशायी थी, जिसका नाम स्वयं दशरथ था तन पर कोई घाव नहीं था, पर अंतर्मन से लथपथ था वाणी से विषबाण चलाकर, जीवन का अमरित ले बैठी जिसने हर रण जीता उसको इक रानी की जिद ले...

भाजपा की चुनावी रणनीति

जब खेलन देनउ नाय तो हाय जे खेल को ड्रामा काइं करनौ बैटिंग करनेवालन के बल्ले ही तोड़ दए हैं रन लेनेवालन के दोनूं जूते जोड़ दए हैं सीमा कू चर गई गाय आय हाय जे खेल को ड्रामा काइं करनौ कैसे फेंकें गेंद समूची पिच ही खोद रखी है अपनी तीनों किल्ली तुमने भगवा पोत रखी हैं भगवा...
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