+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

अकेला

हर दिन बढ़ता ही जाता है मेरे आंगन का वीराना और अकेला कर जाता है हर दिन कोई यार मुझे ✍️ चिराग़ जैन

मदद की होड़

रेगिस्तान की दोपहर में पानी को तरस रहा एक प्यासा तपती हुई रेत में पड़ा था; ऊपर से सूरज का भी रुख कड़ा था। उसको पानी देने के लिए केंद्र सरकार ने बिल पास किया; राज्य सरकार ने भी उसका स्वतः संज्ञान लिया। लेकिन ज्यों ही राज्य सरकार का कारिंदा मदद लेकर प्यासे की ओर बढ़ा, उसके...

श्मशानों में चहल-पहल है

सबके एकाकी मन में हैं जाने कितनी शोक सभाएँ पीपल के पेड़ों ने पूछा इतने घण्ट कहाँ लटकाएँ हर पल पर डर का कब्ज़ा है, हर क्षण पर दहशत के पहरे घाव दिलों पर इतने गहरे, हँसना भूल चुके हैं चेहरे आँखें रोकर पूछ रही हैं कितने आँसू और बहाएँ पीपल के पेड़ों ने पूछा इतने घण्ट कहाँ...

नया धर्म : सेंड टू ऑल

आज मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश में कोई आम आदमी है ही नहीं। हर नागरिक के दुनिया के बड़े से बड़े आदमी से डायरेक्ट कॉन्टेक्ट हैं। और सबको ही कोई कल्पवृक्ष टाइप की सिद्धि प्राप्त है। यही कारण है कि जब उन्हें पैनडेमिक से संबंधित कोई पुख्ता जानकारी चाहिए होती है तो उनके...

कितनी मुहब्बतें

नोएडा से एक फोन आया। फोन करनेवाला व्यक्ति स्वयं पॉजिटिव होकर अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ घर पर क़ैद था और उसकी पत्नी अस्पताल में कोविड से लड़ रही थी। बीमारी, चिंता, नन्हें बच्चे का लालन-पालन, अर्द्धांगिनी का रोग, अर्थ, अभाव…! उस दिन मन बहुत उदास था। मदद की गुहार...
error: Content is protected !!