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अस्तित्व का मूल्य

हाँ, जगत् में एक कण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस कण की चमक दुगुनी करेगा हाँ, समय में एक क्षण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस क्षण की दमक दुगुनी करेगा साँस है बस दास प्राणों की किसी आह्लाद के बिन हर इमारत ताश का घर है महज; बुनियाद...

ओशो कम्यून की पहली शर्त

ख़ुद से मिलने की ख़ुशी क्या होती है, इसका एहसास मुझे तब हुआ जब मैंने कम्यून में प्रवेश किया। हर चेहरे पर एक नैसर्गिक प्रसन्नता, हर आँख में एक प्राकृतिक चमक, हर पाँव में एक अनायास थिरक …उत्सव वहाँ आयोजित नहीं, घटित हो रहा था। वहाँ सब अपने पूरे अस्तित्व के साथ घूम...

नवरात्रि और स्त्री

चैत्र मास की नवरात्रि मनुष्य जाति में प्रचलित सर्वाधिक विशेष उत्सवों में एक हैं। स्त्री मन की नौ अलग-अलग दशाओं की आराधना ही नहीं अपितु साधना तक की परंपरा का विधान है इस पर्व में। और थोड़ा सा ध्यान से देखें तो देवी के इन नौ रूपों में काव्य के नौ रस भी सहज ही दिखाई दे...

मैं महज किरदार जीता हूँ

एक मैं, कितना झमेला विश्व मुझ जैसों का मेला इस समूची सृष्टि को जो साध लेता है अकेला बस उसी के खेल का विस्तार जीता हूँ मैं महज किरदार जीता हूँ मैं वही जिसने जनम के साथ इक परिवार पाया हार हो या जीत हो, परिवार सब स्वीकार पाया जब जहाँ जो भी मिला सब भोगकर जीता रहा हूँ...

आस्था का अपमान

जो आस्था न तोड़ सका उसने मन्दिर तोड़े और जो विचार को न मिटा सका वह किताबें जलाने लगा। लेकिन यह कृत्य वीरता का नहीं, अपितु स्वयं के परास्त होने की घोषणा है। अभिमन्यु की हत्या करके कौरवों ने पाण्डवों को आतंकित नहीं किया था अपितु आश्वस्ति प्रदान की थी कि कौरवों का नैतिक...
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