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अहंकार का अंत

बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड, यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी, वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया, यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन, वह वनवासी महाकाल सिद्ध हो गया ✍️...

शबरी

नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...

अहल्या

साँस न थी पर आस की डोर पे जीवित थी दुखियारी अहल्या शाप के ताप को, स्वर्ग के पाप को झेल रही थी बेचारी अहल्या देखने में बस पाहन थी, मन में धरती से थी भारी अहल्या देखो शिला में भी प्राण बहे जब राम ने छूकर तारी अहल्या ✍️ चिराग़...

हनुमान : भक्त से मित्र हो जाने की यात्रा

अगाध समर्पण का साकार रूप हैं हनुमान। निस्पृह भक्ति का शाश्वत उदाहरण हैं हनुमान। श्रीमत् हनुमान की वीरता अन्य किसी भी वीर की वीरता से इसलिए विशेष है, क्योंकि हनुमान की वीरता समर्पण से उत्पन्न हुई है। श्रीराम के प्रति वीरवर हनुमान का जो समर्पित प्रेम था, उसी की कुक्षि...

सीता की पाती

मुझको तो वन में रहने का काफ़ी है अभ्यास सुनो! लेकिन तुमने दे डाला है ख़़ुद को कितना त्रास सुनो! तुमने त्याग दिया है मुझको, पर मुझमें बाक़ी हो तुम मैं तुमको संग ले आयी हूँ, कितने एकाकी हो तुम मुझको बस वनवास दिया है, ख़़ुद को कारावास सुनो! मुझको तो वन में रहने का काफ़ी है...
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