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परवीन बॉबी

22 जनवरी 2005 को शाम के बुलेटिन में ख़बर आई की दक्षिणी मुम्बई के एक फ्लैट से परवीन बॉबी का शव बरामद हुआ है। समाचार वाचक ने बताया कि परवीन बॉबी की मौत के दो दिन बाद पुलिस ने उनका शव बरामद किया। मुझे आज भी अच्छी तरह याद है कि उस दिन वह समाचार बुलेटिन मेरे भीतर एक सिहरन...

भयभीत मोड के जीव

मोबाइल फोन की तरह मन भी अलग-अलग परिस्थिति में अलग-अलग मोड पर सैट हो जाता है। सम्भवतः मनोविज्ञान में इसी को मूड कहा जाता हो। कभी हम बहुत ख़ुश होते हैं, मतलब हम हैप्पी मोड में हैं। ऐसे ही सैड मोड, कन्फ्यूज़्ड मोड और एंग्री मोड भी हम सबके भीतर ऑन-ऑफ होते रहते हैं। यह सहज...

कोशिश

मैं ‘मन’ लिखने की कोशिश करता हूँ ….सिर्फ़ कोशिश। कभी इसका मन कभी उसका मन कभी सबका मन …और कभी-कभी अपना भी मन। इतना ही समझ आता है मुझे कि ‘कोशिश’ और ‘कामयाबी’ उर्दू ज़ूबान के दो अलग-अलग अलफ़ाज़ हैं! ✍️ चिराग़...

ऐब्स्ट्रेक्ट

किसी की याद के कुछ रंग यक-ब-यक बिखर जाते हैं ज़ेहन के कॅनवास पर। और मैं ठहर कर निहारने लगता हूँ उस कलाकृति की ख़ूबसूरती को। बूझने लगता हूँ अतीत के स्ट्रोक्स की जटिल पहेलियाँ। आज तक समझ नहीं पाया हूँ कि ये ऐब्स्ट्रेक्ट बना तो बना कैसे? ✍️ चिराग़...

ग़लतफ़हमी

एक लमहे के लिए सारी जवानी काट दी ठीकरों की चाह में इक फ़स्ल धानी काट दी इक न इक दिन कोई तो समझेगा हाले-दिल मिरा इस ग़लतफ़हमी पे सारी ज़िन्दगानी काट दी ✍️ चिराग़...
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