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हादसा थी ज़िन्दगी

हादसा थी ज़िन्दगी, होता रहा जो उम्र भर दौलते-लमहात थी, खोता रहा जो उम्र भर कौन समझे उसके अश्क़ों की ढलकती दास्तां बस दरख़तों से लिपट, रोता रहा जो उम्र भर अब तो कलियों से भी उसकी पीठ क़तराने लगी पत्थरों को गुल समझ ढोता रहा जो उम्र भर इक न इक दिन उसका घर अश्क़ों में डूबेगा...

नज़रिया

मुझे इन्सान चारों ओर नज़र आता है अक्स अपना ही तो हर ओर नज़र आता है ये दुनिया शायद आइनों की इक इमारत है तुझे हर शख्स यहाँ चोर नज़र आता है ✍️ चिराग़...

सूरज

फिर अंधेरा निगल गया सूरज फिर चिराग़ों को खल गया सूरज चंद पहरों की ज़िन्दगानी में कितने चेह्रे बदल गया सूरज गर हुआ ऑंख से ज़रा ओझल लोग कहते हैं ढल गया सूरज रात गहराई तो समझ आया सारी दुनिया को छल गया सूरज आज फिर रोज़ की तरह डूबा कैसे कह दूँ सँभल गया सूरज ✍️ चिराग़...

लोग आते-जाते हैं

दिल भी है इक ख़ूबसूरत से इदारे की तरह लोग आते-जाते हैं, पानी के धारे की तरह जब से ये संसार सारा हो गया है आसमां तब से है इन्सानियत टूटे सितारे की तरह चल सको तो तुम किसी के बन के उसके संग चलो वरना इक दिन छूट जाओगे सहारे की तरह दिल के रिश्तों को फ़रेबी उंगलियों से मत छुओ...

इक पहेली हूँ

धूप में निखरोगे मेरी छाँव में जल जाओगे इक पहेली हूँ, कहाँ तुम ढूंढने हल जाओगे बर्फ़-सी ठंडक तो उसकी बात में होगी मगर छू लिया जिस पल उसे उस पल ही तुम जल जाओगे विषधरों के दंश का संकट भी झेलोगे ज़रूर जब कभी लेने किसी जंगल से संदल जाओगे धूप बनकर तुम दलानों में पसरते हो मगर...
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