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आकांक्षा

तलवे याद न रख सकें, मिट्टी का अहसास इतना ऊँचा मत रखो सपनों का आकाश ✍️ चिराग़ जैन

जीवन को कुछ यूँ जियो

बात यहीं से हो शुरू, और यहीं हो बन्द जीवन को कुछ यूँ जियो, जैसे दोहा छन्द ✍️ चिराग़ जैन

अन्तर

अन्तस् की पावन भोगभूमि और मानस की पवित्र भावभूमि पर बसी अधरों की सौम्यता। लोचनयुगल में अनवरत प्रवाहमान विश्वास की पारदर्शी भागीरथी अनायास ही छलक पड़ती है सागरमुक्ता-सी दन्तपंक्ति के पार्श्व से प्रस्फुटित निश्छल खिलखिलाहट के साथ। और इस पल को शब्दों में बांधने के निरर्थक...

स्वार्थ

तीर कोरे स्वार्थ के जब तरकशों से जुड़ गए बाम पर बैठे कबूतर फड़फड़ाकर उड़ गए स्वार्थ शामिल हो गया जब से हमारी सोच में पग हमारे ख़ुद-ब-ख़ुद राहे-गुनाह पर मुड़ गए ✍️ चिराग़...

तमन्ना

है तमन्ना यही प्यार जीता रहे सबका जीवन गुनाहों से रीता रहे भावना सब के दिल में यही जन्म ले दुख मैं पीता रहूँ सुख तू पीता रहे ✍️ चिराग़...
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