Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose, Story
एक शरारती लड़का पूरे मोहल्ले के लोगों को तंग करता रहता था। वो रात में चैन से सोते लोगों के घर की घंटी बजाकर भाग जाता था। कई बार उसे समझाया गया। पंचायत में भी उसे टोका गया। लेकिन वो समझने को तैयार नहीं था। रोज़ की तरह एक दिन वह किसी की घंटी बजाने की सेंध लगाए बैठा था। उसी मौके का लाभ उठाकर एक दबंग पड़ोसी ने उस शरारती लड़के के घर पर खुजली का पाउडर बिखेर दिया। सूना है कि वो लड़का गाँव के जोहड़ में खुजा-खुजा कर खूनमखून बरामद हुआ है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose, Story
मोदी जी – “नवाज़ साहब, आप ये बार बार सीमा की शांति क्यों भंग करते हो?”
नवाज़ – “अरे मोदी जी, हमारे यहाँ 8 राज्य हैं, उनमें चुनाव होते हैं तो जनता का समर्थन जुटाने के लिए हमें भारत से छेड़ छाड़ करनी पड़ती है।”
मोदी जी – “ऐसा करके क्या सचमुच चुनाव जीता जा सकता है?”
नवाज़ – “100℅”
मोदी जी – “तो बेट्टा, अब तू देख। हमारे यहां 29 तो राज्य हैं, फिर 7 केंद्र शासित प्रदेश, फिर राज्यसभा के चुनाव, फिर नगर निगम …और हम तो यूनिवर्सिटी इलेक्शन तक को सीरियसली लेते हैं। तुम छेड़छाड़ की बात कर रहे हो हम तो छू छू कर ही मार डालेंगे।”
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
भारतीय सेना दैदीप्यमान सूरज है। उसे घूर कर देखोगे तो उसके बाद एक दिन क्या पूरा जीवन ही काला दिखाई देगा।
हमें क्या पता था कि कश्मीरियों ने जो पत्थर भारतीय सेना पर फेंके थे वो पाकिस्तान की अक्ल पर जा पड़ेंगे।
जिस सिस्टम से हम जीवन की मूलभूत ज़रूरतों की मांग करते हैं, वो मरने की व्यवस्था भी ठीक से कर देता तो गनीमत थी।
पाकिस्तान को तो देवी मैया ने बचा रखा है। अगर नवरात्रों ने “लाहौरी नमक” न खाया होता तो भारत माता इस ससुरे को कबका महिषासुर बना चुकी होती।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
इस कदर नफ़रत बढ़ी है, हो गये त्योहार घायल
रात भर की नींद घायल, सुब्ह का अख़बार घायल
ईद को डर है, वजू की हौद में तेज़ाब ना हो
शाम की मजलिस कहीं बस दो घड़ी का ख़्वाब ना हो
रह नहीं जाएँ नयी नस्लें मिठासों से नदीदी
दे न दे कोई क़फ़न की शक्ल में इस बार ईदी
मस्जिदों की सीढ़ियाँ ज़ख़्मी हैं, कुल बाज़ा घायल
रात भर की नींद घायल, सुब्ह का अख़बार घायल
सावनी उत्सव सभी दहशत के रंगों में रंगे हैं
जिस जगह झूला पड़ा था, अब वहाँ मातम टंगे हैं
तीज पर बाबुल के घर का रास्ता मुश्किल कटा है
जिस डगर आएगी लाडो, उस डगर कल बम फटा है
भाई-बहनों का कलाई पर सँवरता प्यार घायल
रात भर की नींद घायल, सुब्ह का अख़बार घायल
आयतों की आड़ में गोली चली रमज़ान रोया
स्वर्ण मंदिर में बहा खूँ, शौर्य का बलिदान रोया
मौत का तांडव मिला है, धर्मगुरुओं के दरों पर
सब पे शासन की तमन्ना छा गई गिरजाघरों पर
शस्त्र से सब शास्त्र आहत, स्वार्थ से अवतार घायल
रात भर की नींद घायल, सुब्ह का अख़बार घायल
आपसी सद्भाव इतना हो कि नफ़रत टिक न पाये
फूल का बाज़ार यूँ पनपे कि असला बिक न पाये
ज़ख़्म को मरहम मिला तो दम घुँटेगा दहशतों का
आदमीयत ही पढ़ेगी फ़ातिहा इन नफ़रतों का
काश मानवता दरिंदों को करे इक बार घायल
रात भर की नींद घायल, सुब्ह का अख़बार घायल
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Diary, Ek Adad Kirdar, Prose
ख़ुद को ख़ुदा के बन्दे और जेहादी कहने वाले खूंखारों ने ख़ुदा की इबादत और ख़ुदा से मुहब्बत का पैग़ाम देने वाली एक बेहतरीन आवाज़ को ख़ामोश कर दिया। रूह से उठने वाला वो अलाप जो सुनने वालों को सीधे रूहानियत के गलियारों तक लिए जाता था, वो अलाप स्वयंभू जेहादियों पर एक धिक्कार के साथ हमेशा के लिए बंद हो गया।
दहशतगर्दी की दुनिया रूहानियत को नहीं समझ सकती, क्योंकि रूहानियत का तअल्लुक़ रूह से होता है। ईश्वर, अल्लाह, ख़ुदा या जो भी कोई पारलौकिक सत्ता इस सृष्टि के पीछे है; उसके कोप की इस समय आवश्यकता है। अब इस दुनिया को समझना होगा कि संसार में सिर्फ दो ही तरीके के लोग हैं- 1) दहशतगर्द और 2) इंसान।
दहशतगर्दी के खिलाफ इंसानियत को एक होकर लड़ना होगा; तभी मुहब्बत के पैगम्बरों के लिए सुकून मुहैया हो सकेगा।
✍️ चिराग़ जैन
Ref : Death of Amjad Farid Sabri